जीआई विशेषज्ञ डॉ. रजनीकांत ने बताया कि एक वर्ष में 75 जीआई आवेदन किया गया था, अब इस उपलब्धि के साथ इसे पीछे छोड़ दिया गया है। वाराणसी और आसपास के जनपदों में अभी भी 34 जीआई टैग के साथ भारत नहीं बल्कि पूरे विश्व में एक भूभाग में सर्वाधिक जीआई का गौरव प्राप्त है। इसमें लगभग 20 लाख लोग परोक्ष व अपरोक्ष रूप से 25500 करोड़ रुपये का सालाना कारोबार कर रहे हैं।
इसमें कुछ प्रमुख उत्पाद जैसे बनारस क्ले क्राफ्ट, लखनऊ क्ले क्राफ्ट, मेरठ बिगुल, राजस्थान का रावणहत्था, जोधपुर वुड क्राफ्ट, जयपुर मार्बल क्राफ्ट, बस्तर स्टोन क्राफ्ट, छत्तीसगढ़ पनिका साड़ी, झारखंड डोकरा, पंछी परहन साड़ी, जादू पटिया पेंटिंग, त्रिपुरा केन क्राफ्ट, त्रिपुरा बम्बू क्राफ्ट, लद्दाख चिली मेटल क्राफ्ट, लेह लिकिर पाटरी, लेह चाल टेक्सटाईल, कश्मीर अम्बरी सेव एवं महराजी सेव, अखरोट, काश्मीरी नदरू, काश्मीरी हाक, किश्तवार चिलगोजा, गुरेज राजमाश, किश्तवारी ब्लैकेट सहित 80 परंपरागत उत्पाद इस जीआई पंजीकरण प्रक्रिया में शामिल हुए हैं।