फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सोमा के सुरों से शहनाई की जुगलबंदी

Tue, 22 Mar 2016 02:14 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला वाराणसी
विज्ञापन
विज्ञापन
शहनाई के उस्ताद की याद में सोमवार की रात गायन, वादन, नृत्य की त्रिवेणी बही तो संगीत प्रेमियों ने खूब गोता लगाया। पद्मश्री सोमा घोष ने शहनाई पर सुरों की जुगलबंदी की तो पद्मश्री मालिनी अवस्थी ने दादरा, ठुमरी, होरी, चैती की बंदिशों से फागुनी बयार में रस घोला। कदरी गोपाल नाथ के सेक्सोफोन पर लोग मुग्ध हुए तो नलिनी-कमलिनी के कथक नृत्य की बेजोड़ थिरकन ने हर किसी का ध्यान खींचा। नागरी नाटक मंडली के प्रेक्षागृह में उस्ताद की जन्मशती पर आयोजित संगीत महोत्सव सुर-बनारस की तीसरी निशा सुर, लय, ताल के ऐसे की सफर के साथ यादगार बनी।
विज्ञापन



संगीत नाटक अकादमी की ओर से आयोजित सुर-बनारस की शाम सोमा घोष के कोकिल कंठों से हुआ। उन्होंने पहले उस्ताद की याद में बंदिश पेश की। फिर राग विहाग में उन्होंने शहनाई के साथ जोरदार जुगलबंदी की। होरी-आज बिरज में होरी रे रसिया... के बाद तराना से विराम लिया। शहनाई पर उस्ताद के पुत्र उस्ताद जामिन हुसैन, रामकृष्ण चौधरी, अली अंसार थे। दुक्कड़ पर मंगल प्रसाद, कीबोर्ड पर हेमंत ने संगत की। इनके बाद नृत्यानंद हल्दीपुर ने बांसुरी पर राग मारवा की अवतारणा की। तबले पर संगत की विनोद लेले ने। इनके बाद ध्रुपद गायक प्रो. ऋत्विक सान्याल ने राग यमन कल्याण में धमार ताल में निबद्ध बंदिश की अवतारणा की। अलापचारी के बाद उन्होंने राग काफी में सूलताल में निबद्ध पारंपरिक बंदिश की प्रस्तुति कर लोगों को मुग्ध किया। इनके बाद सेक्सोफोन के जाने माने कलाकार कदरी गोपाल नाथ ने राग वृंदावनी सांरग की अवतारणा की।


इसके बाद राग कल्याण वसंत में उन्होंने दूसरी बंदिश बजाया। इनके साथ वायलिन पर कन्या कुमारी, मृदंगम पर यू प्रवीण, तबले पर राजेंद्र नाकोड़, मोरचंग पर वी राजशेखर ने संगत की। फिर बारी आई उप शास्त्रीय गायिका पद्मश्री मालिनी अवस्थी की। मालिनी ने राग खंबावती में ठुमरी से शुरुआत की। बंदिश के बोल थे-होरी खेलो मोसे नंदलाल...। इसके बाद राग गारा में दादरा की बंदिश- भरि-भरि आए गोरिया के नयनवा...की उन्होंने प्रस्तुति की। इसके बाद होरी- उड़त अबीर गुलाल और फिर आग लागे सैंया की सुरतिया... की प्रस्तुति की। तबले पर अभिषेक मिश्र और हारमोनियम पर पं. धर्मनाथ मिश्र ने संगत की।
विज्ञापन

अंत में नलिनी-कमलिनी ने कथक नृत्य की बेजोड़ थिरकन से संगीत प्रेमियों को मुग्ध किया। शिव स्तुति के बाद उन्होंने होरी की बंदिश- मत मारो कनक पिचकारी पर आमद, उठान, तोड़ा, टुकड़ा, परन और गत निकास की मोहक प्रस्तुति की।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें