आगामी दीवाली तक शहर एलईडी (लाइट इमिटिंग डायोड) स्ट्रीट लाइट से जगमगाता नजर आएगा। केंद्र सरकार के विद्युत मंत्रालय की सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी एनर्जी एफिसिएंसी सर्विसेज लिमिटेड (ईईएसएल) यह कार्य कराएगी। इसके लिए जनवरी के अंत तक नगर निगम प्रशासन और कंपनी के बीच करार होने की संभावना है।
मार्च से काम शुरू कर उसे अक्तूबर तक पूरा कर देने की तैयारी है। इस पर लगभग 58 करोड़ रुपये खर्च होंगे। एलईडी स्ट्रीट लाइट लगने के बाद बिजली की खपत कम होने से नगर निगम को सालाना तकरीबन 15 करोड़ रुपये की बचत होगी। शहर में बिजली के तारों को भी जल्द भूमिगत करने की तैयारी है।
बीते मंगलवार को नई दिल्ली स्थित शहरी विकास मंत्रालय में क्योटो और काशी के संबंध में बैठक हुई थी। इसमें शामिल होकर लौटे महापौर रामगोपाल मोहले ने शुक्रवार को बताया कि बैठक के बाद उन्होंने ऊर्जा मंत्रालय के ब्यूरो आफ एनर्जी एफिसिएंसी के सचिव भास्कर जे. शर्मा और ईईएसएल के प्रबंध निदेशक सौरभ कुमार से मुलाकात की थी।
दोनों अधिकारियों ने प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र को जल्द से जल्द एलईडी से जगमग करने और बिजली के तारों को भूमिगत करने की बात कही। इसके तहत शहर में 36,077 स्थान पर लगी स्ट्रीट लाइटें बदली जाएंगी। उनकी जगह एलईडी स्ट्रीट लाइट लगाई जाएगी।
महापौर ने बताया कि कंपनी ने अनुमति लेने के लिए अपना प्रस्ताव तैयार कर लिया है। जल्द ही उसके प्रतिनिधि आएंगे। करार पर हस्ताक्षर होते ही कंपनी काम शुरू कर उसे लगभग छह माह में पूरा करने की कोशिश करेगी।
सात साल में देने होंगे पैसे
महापौर रामगोपाल मोहले ने बताया कि ईईएसएल के सर्वे के अनुसार शहर में एलईडी स्ट्रीट लाइट लगाने में 47.78 करोड़ का खर्च आएगा। जबकि पोल, केबिल, स्विच गियर सहित अन्य जरूरी उपकरण के लिए 10 करोड़ लगेंगे। यह पैसा नगर निगम सात साल में कंपनी को देगा। साथ ही, जो भी कांट्रैक्ट पीरियड निर्धारित होगा, उस समय तक कंपनी की ओर से लाइट्स के मेंटेनेंस का काम किया जाएगा।
167.4 लाख यूनिट बिजली बचेगी
शहर में एलईडी स्ट्रीट लाइट लगने के बाद सालाना 167.4 लाख यूनिट बिजली की बचत होगी। इससे नगर निगम को बिजली मूल्य के तौर पर 10.02 करोड़ रुपये की बचत होगी। साथ ही स्ट्रीट लाइट के सालाना मेंटेनेंस के तौर पर खर्च होने वाले लगभग पांच करोड़ रुपये भी बचेंगे।