आठ अप्रैल को प्राचीन परंपरा को निभाते हुए नगरवधुएं बाबा के दरबार में अपनी हाजिरी लगाएंगी। दिलीप ने बताया कि कार्यक्रम स्थल पर जहां मंच लगते हैं, वहीं अवैध रूप से लकड़ी रखकर कब्जा जमा लिया गया है। इसके कारण आयोजन पर संशय बना हुआ है। नगर निगम की ओर से चेतावनी के बाद भी लकड़ी कारोबारियों ने अतिक्रमण नहीं हटाया।
महाश्मशान नाथ सेवा समिति के संरक्षक जंत्रलेश्वर यादव बताते हैं कि राजा मानसिंह द्वारा स्थापित बाबा मसाननाथ के दरबार में कार्यकम पेश करने के लिए उस समय की जानी-मानी नर्तकियों और कलाकारों को बुलाया गया था। चूंकि मंदिर श्मशानघाट के बीचों बीच था, लिहाजा ख्यातिलब्ध कलाकारों ने इनकार कर दिया। राजा ने कार्यक्रम का ऐलान करवा दिया था। अब समस्या यह कि कार्यक्रम कैसे हो? तब नगरवधुओं को आमंत्रित किया गया। नगरवधुओं ने राजा मानसिंह का निमंत्रण स्वीकार किया और तब से यह परंपरा चली आ रही है।