सरकार भले ही हर गरीब को सुविधाएं-संसाधन मुहैया कराने की योजनाएं बनाती रहे लेकिन इस ‘तंत्र’ के मकड़जाल में उलझकर लक्ष्य से भटक जाना तमाम योजनाओं की नियति बन गई है। हर गरीब तक अनाज पहुंचाने के लिए सरकार ने राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना तैयार की। हालात यह हैं कि जिले के कोटेदार हर महीने गरीबों के नाम पर 50 लाख रुपये का अनाज डकार जा रहे हैं।
जिले के एक लाख पात्र लोगों को अब तक नया राशन कार्ड ही नहीं मिल सका है। विभागीय अफसरों की मिलीभगत से इनके हिस्से के अनाज की धड़ल्ले से कालाबाजारी हो रही है। तमाम लोग जो कार्ड के लिए राशन की दूकानों पर पहुंच रहे हैं, उन्हें टरका दिया जा रहा है। इस तरह हर महीने 40 से 50 लाख रुपये का गरीबों का अनाज कोटेदार हजम कर रहे हैं।
अर्दली बाजार के कैलाश और विभा देवी ने बताया कि अब तक उनका राशन कार्ड ही नहीं बना है। कोटे की दुकान पर कोटेदार भगा देता है। पूछने पर कहता है कि जब कार्ड बन जाएगा तब अनाज लेने आना। इस समस्या से जिले के एक लाख पात्र परिवार के लोग जूझ रहे हैं। इनके राशन कार्ड अब तक मिले ही नहीं हैं जबकि इनका नाम पात्रता सूची में दर्ज है और नियमत: इन्हें अनाज मिलना चाहिए लेकिन फिर वही भ्रष्टाचार का खेल...।
औसतन एक गरीब परिवार को सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत प्रति माह 75-100 रुपये में महीने भर का अनाज (गेहूं और चावल) मिलता है। इस हिसाब से एक लाख लोगों के खाद्यान्न की कीमत में से काफी कम भी करें तो भी करीब 50 लाख रुपये से ज्यादा का खाद्यान्न कालाबाजारी के भेंट चढ़ जा रहा है।