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वाराणसी: चाइनीज मांझा बना जान का दुश्मन, छात्राओं ने रोक लगाने के लिए चलाया जागरूकता अभियान

Wed, 14 Oct 2026 10:39 AM IST
किशन चौबे अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी

सार

वाराणसी में सुबह-ए-बनारस क्लब ने प्रतिबंधित चाइनीज मांझे के खिलाफ जागरूकता अभियान चलाया। छात्राओं से भाइयों और आसपास के लोगों को चाइनीज मांझे का इस्तेमाल नहीं करने के लिए जागरूक करने की अपील की गई। संस्था ने प्रशासन से पूरे साल प्रतिबंधित मांझे की बिक्री और इस्तेमाल के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
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चाइनीज मांझा, प्रतिबंधित मांझा, वाराणसी, सुबह-ए-बनारस क्लब - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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प्रतिबंधित चाइनीज मांझे की बिक्री और इस्तेमाल पर सालभर सख्ती से रोक लगाने की मांग को लेकर बुधवार को जनजागरूकता अभियान चलाया गया। सामाजिक संस्था सुबह-ए-बनारस क्लब के बैनर तले मैदागिन स्थित श्री हरिश्चंद्र बालिका इंटरमीडिएट कॉलेज परिसर में छात्राओं को चाइनीज मांझे के खतरों के बारे में बताया गया।

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संस्था के अध्यक्ष समाजसेवी मुकेश जायसवाल और कॉलेज की प्रधानाचार्या डॉ. प्रियंका तिवारी के नेतृत्व में हुए अभियान में छात्राओं से अपने भाइयों और आसपास के लोगों को प्रतिबंधित चाइनीज मांझे से पतंग न उड़ाने के लिए जागरूक करने की अपील की गई।
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हादसों के बाद कार्रवाई पर सवाल
मुकेश जायसवाल और डॉ. प्रियंका तिवारी ने कहा कि पतंग उड़ाने का शौक सदियों पुराना है, लेकिन प्रतिबंधित चाइनीज मांझे के कारण यह शौक अब जानलेवा बन गया है। उन्होंने कहा कि हाल के दिनों में कई लोग चाइनीज मांझे की चपेट में आकर जान गंवा चुके हैं। कज्जाकपुरा फ्लाईओवर पर साड़ी कारोबारी सुनील कुमार गुजराती की गले में मांझा फंसने से मौत का भी उन्होंने उल्लेख किया।

उन्होंने कहा कि किसी हादसे के बाद प्रशासन छापेमारी और कार्रवाई करता है। दुकानों से प्रतिबंधित मांझा बरामद किया जाता है और आरोपियों की गिरफ्तारी भी होती है। यदि इसी तरह पूरे साल अभियान चलाया जाए तो मांझे से होने वाली घटनाओं को काफी हद तक रोका जा सकता है।

स्वदेशी मांझे के इस्तेमाल की अपील
संस्था के पदाधिकारियों ने पतंग उड़ाने के शौकीनों से प्रतिबंधित विदेशी मांझे का इस्तेमाल नहीं करने की अपील की। उन्होंने कहा कि जनहित और मानव जीवन की सुरक्षा को देखते हुए स्वदेशी मांझे का इस्तेमाल किया जाना चाहिए।
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उन्होंने कहा कि प्रतिबंध के बावजूद चाइनीज मांझे की बिक्री का खतरा बना हुआ है। इससे इंसानों के साथ पशु-पक्षी भी प्रभावित होते हैं। उन्होंने प्रशासन से प्रतिबंधित मांझे की बिक्री और इस्तेमाल के खिलाफ पूरे साल अभियान चलाने की मांग की।

कार्यक्रम में श्याम दास गुजराती, ललित गुजराती, बीडी टकसाली समेत सैकड़ों छात्राएं शामिल रहीं।

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