खिचड़ी नजदीक आते ही पतंग और मंझे की बिक्री बढ़ गई है। देशी मंझे की तुलना में चाइनीज मंझा सस्ता और मजबूत होने के कारण इसकी बिक्री ज्यादा होती है। लेकिन चाइनीज मंझा पर प्रतिबंध है इसके बावजूद शहर में चाइनीज मंझे की बिक्री जारी है।
चाइनीज मंझे से आए दिन लोगों की जान खतरे में पड़ रही है। वाराणसी के आदमपुर थाना अंतर्गत कज्जाकपुरा स्थित आरडीएच कॉलोनी निवासी मृत्युंजय दास रविवार को भदऊं चुंगी क्षेत्र में बाइक से दूध लेने जा रहे थे।
इसी दौरान चाइनीज मांझा गले में फंसा। उसे हटाने के दौरान उनका हाथ जख्मी हो गया और अनियंत्रित होकर मृत्युंजय सड़क पर गिर पड़े। मृत्युंजय के हाथ में आठ टांके लगाने पड़े। घर के अकेले कमाऊ सदस्य मृत्युंजय को अब लगभग दो हफ्ते कामकाज छोड़ कर बैठना होगा।
अकेले मृत्युंजय प्रतिबंधित चाइनीज मंझे के शिकार नहीं हुए हैं। दिसंबर महीने में ही अब तक दर्जन भर से ज्यादा लोग और कई पक्षी इसकी चपेट में आकर गंभीर रूप से घायल हो चुके हैं। बावजूद इसके पुलिस और प्रशासन के अधिकारी हाथ पर हाथ धरे बैठे हुए हैं और चाइनीज मंझे की धड़ल्ले से बिक्री जारी है।
जिलाधिकारी की ओर से भी कई बार अभियान चलाकर चाइनीज मंझे की बिक्री पर रोक लगाने का आदेश जारी किया गया लेकिन प्रशासनिक मजिस्ट्रेटों और थानेदारों के कान पर जूं तक नहीं रेंगी।
सोमवार को फिर डीएम योगेश्वर राम मिश्र ने मजिस्ट्रेटों और थानेदारों को निर्देश दिया है कि अभियान चलाकर चाइनीज मंझा बेचने वालों के खिलाफ कार्रवाई करें। इस संबंध में शिथिलता बरतने पर थानेदार और प्रशासनिक अधिकारी कार्रवाई की जद में आएंगे।
सुप्रीम कोर्ट ने भी मंझे की बिक्री पर लगाई है रोक
घायल मृत्युंजय दास
- फोटो : अमर उजाला
चाइनीज मंझा कांच और धातु के बुरादे के साथ ही लोहे और केमिकल के मिश्रण से तैयार किया जाता है। इसके चलते यह बेहद खतरनाक होता है। इसी वजह से सुप्रीम कोर्ट, एनजीटी और सरकार की ओर इसकी बिक्री पर रोक लगाई गई है।
मगर, प्रतिबंध के बावजूद शहर के दालमंडी, हड़हा सराय, नई सड़क सहित शहर के अन्य इलाकों में चाइनीज मंझे की बिक्री जारी है। चाइनीज मंझे से घायल मृत्युंजय दास ने कहा कि यह मंझा जानलेवा है।
इसे बेचने वालों के खिलाफ पुलिस और प्रशासन को गंभीरता से कार्रवाई करनी चाहिए नहीं तो किसी दिन किसी की जान भी जा सकती है। कुछ दिनों पूर्व चाइनीज मंझे से घायल हुए लंका क्षेत्र के रामलाल ने कहा कि गले पर ऐसा जख्म हुआ कि लगा कि जीवित बच पाना मुश्किल है।
मगर, किसी तरह से डॉक्टरों ने जान बचाई। थानेदार सख्ती बरतें तो चाइनीज मंझे की बिक्री पर अंकुश लगे। अस्सी में पतंग और मंझा खरीद रहे शशिकांत शर्मा और श्यामा कांत ने बताया कि हम देशी मंझा ही प्रयोग करते हैं और चाइनीज मंझे के खिलाफ हैं।
चाइनीज मंझे से अक्सर पतंग उड़ाने के दौरान अपना हाथ भी लहूलुहान हो जाता है। रोजाना होने वाले हादसों से लोग भी सबक लें और चाइनीज मंझे का बहिष्कार करें।