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चीन के उत्पादों का बड़ा बाजार है सराय हड़हा

Tue, 04 Oct 2016 01:59 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
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सोशल मीडिया पर चाइनीज सामान के बहिष्कार की मुहिम छिड़ गई है। लोग फेसबुक और ट्विटर पर लामबंद होने लगे हैं कि वे चीन निर्मित सामान का बहिष्कार करेंगे। ऐसे वक्त में भी पाकिस्तान का साथ देने वाले चीन की इलेक्ट्रिक झालरें, सजावटी सामान और पटाखे इस दीवाली पर कतई नहीं खरीदेंगे। सोशल मीडिया पर लोगों का कहना है हम भारतवासियों के ऐसा करने से हमारे देश की अर्थव्यवस्था को बहुत मजबूती मिलेगी। प्रदेश के श्रम विभाग के अधिकारी पंकज सिंह राणा ने फेसबुक पर लिखा है, ‘मैं पंकज सिंह राणा, उड़ी हमले में में शहीद हुए सैनिकों को श्रद्धांजलि देते हुए यह शपथ लेता हूं कि इस दीवाली में कोई भी चाइनीज सामान नहीं खरीदूंगा। चाहे वह भारतीय सामान की तुलना में कितना ही सस्ता क्यों न हो।’ पंकज सिंह राणा की फ्रेंडलिस्ट से जुड़े ज्यादातर लोगों ने उनकी इस पोस्ट का समर्थन किया है।  इसी तरह फेसबुक पर अजय श्रीवास्तव, जागृति शर्मा, आशीष कुलश्रेष्ठ, दीपक अहलावत जैसे न जाने कितने लोेग हैं जिन्होेंने चाइनीज सामान के बहिष्कार की ठानी है।  फेसबुक पर ही ‘बॉयकाट चाइनीज प्रोडक्ट्स’, ‘बॉयकाट ऑफ चाइनीज प्रोडक्ट्स’, ‘डोंट बाय चाइनीज प्रोडक्ट्स’ और ‘बॉयकाट चाइनीज आइटम्स’ जैसे कम्युनिटी ग्रुप बनाकर लोग चीन निर्मित उत्पादों के बहिष्कार का सकारात्मक माहौल बना रहे हैं। साथ ही इसके फायदे भी बता रहे हैं कि किस तरह चीन का सामान न खरीदने से देश का रुपया देश में ही रहेगा और भारत की अर्थव्यवस्था सशक्त होगी। वाट्सएप पर भी आने वाली दीवाली में चाइनीज सामान न खरीदने की मुहिम चलाई जा रही है। इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘मेक इन इंडिया’ की सोच का सहारा लिया जा रहा है। ट्विटर पर सोनू पांडेय, सत्यम त्रिपाठी, इंजीनियर आलोक कटियार, दीपक जैसे ही न जाने कितने लोग चाइनीज सामान का बहिष्कार करने की मुहिम चलाए हुए हैं।
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उड़ी की घटना के बाद पाकिस्तान के समर्थन में चीन के खड़े होने से नाराज लोगों का एक बड़ा तबका अब चीन निर्मित उत्पादों के बहिष्कार के लिए मुहिम चला रहा है। सोशल मीडिया पर पिछले तीन दिनों से इसे लेकर बहस चल रही है।     हकीकत यह है कि आज हिंदुस्तान के हर घर में चीन निर्मित उत्पादों की भरमार हो गई है। कास्मेटिक्स उत्पाद हों या इलेक्ट्रॉनिक्स गैजेट्स, सब हमारी जीवनशैली का हिस्सा बन चुके हैं। जबकि विशेषज्ञों की राय और कई शोधों में यह बात प्रमाणित हो चुकी है कि ये सामान हमारे स्वास्थ्य के लिए नुकसानदेह हैं। बनारस का सराय हड़हा चीन निर्मित उत्पादों का उत्तर भारत का सबसे बड़ा बाजार है। यहां करीब दो सौ दूकानें ऐसी हैं जहां केवल चीन के उत्पाद ही बिकते हैं।
यूपी के अलावा मध्य प्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़ और झारखंड तक के खरीदार यहां आते हैं। प्लास्टिक के उत्पादों और बैटरी चालित खिलौनों की सराय हड़हा यूपी की सबसे बड़ी मंडी है। एक अनुमान के मुताबिक यहां रोजाना 50 करोड़ रुपये का केवल प्लास्टिक उत्पादों का कारोबार है।
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सराय हड़हा की मंडी में नेपाल, कोलकाता, दिल्ली और मुंबई से चीन के उत्पाद पहुंचते हैं। खासकर चीन में तैयार कास्मेटिक्स के उत्पाद नेपाल के रास्ते बनारस के बाजार तक पहुंचते हैं। हड़हा की मंडी में थोक का कारोबार होता है। लैक्मे, निविया, हिंदुस्तान लीवर समेत कई नामचीन ब्रांड के भी उत्पाद यहां बिकते हैं मगर भारतीय या अन्य विदेशी उत्पादों के मुकाबले कीमत कम होने से चीन के उत्पादों की मांग अधिक है।
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