फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बाल नाट्य महोत्सव: गणित देश, पंचलाइट और हीरामोती से सजा मंच; 40-40 मिनट में दिना अनोखा संदेश

Sun, 16 Nov 2025 05:26 AM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

Varanasi News: शनिवार को नागरी नाटक मंडली के मंच पर लेखिका रेखा जैन, निर्देशक सुमन पाठक और नागरी नाटक मंडली के नाटक गणित देश के साथ नाट्य महोत्सव आरंभ हुआ। 
विज्ञापन
नागरीनाटक मंडली में आयोजित बाल नाट्य महोत्सव में मंचन करते बाल कलाकार। - फोटो : संवाद
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

Bal Natya Utsav: बाल नाट्य महोत्सव की दूसरी संध्या में बाल कलाकारों ने अपनी प्रतिभा से सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। गणित देश से शुरू हुई नाटकों की शृंखला पंचलाइट से होते हुए हीरामोती तक पहुंची। 40-40 मिनट की प्रस्तुतियों में बाल कलाकारों ने नागरी नाटक मंडली के मंच पर नाटकों के जरिए संदेश दिया और अभिनय से जताया कि प्रतिभा को मंच मिले तो वह कमाल जरूर करती है।

विज्ञापन


गणित देश के जरिए संदेश दिया गया कि कुछ बच्चों को गणित को लेकर भय रहता है कि यह कठिन है और हमसे संभव नहीं, और वे उससे दूरी बना लेना चाहते हैं। नाटक के माध्यम से लेखिका ने अंक के महत्व को खूबसूरती से दर्शाया जो सहज रुप में प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रुप में स्वप्न के माध्यम से दिगाम पर असर छोड़ जाता है और भय की मानसिकता को बदल देता है। गीत और नृत्य के माध्यम से इस नाटक की रोचकता बढ़ जाती है।

कलाकारों में दिव्यांश, वेदांगी, वर्ष, चैतन्या, ब्राह्मी, युगाद्या, गुरु, नैतिक व सवि रहे। दूसरी प्रस्तुति लेखक फणीश्वर नाथ रेणु, निर्देशक बालमुकुंद त्रिपाठी व दि लिटिल मून एकेडमी जूनियर हाईस्कूल के नाटक पंचलाइट की रही। पंचलाइट में गांव का सौंदर्य, समाज की विडंबना और मनुष्य का प्रेम सब साथ चलते हैं। 

विज्ञापन
विज्ञापन

कलाकारों ने दी सांस्कृतिक प्रस्तुति

यह प्रेम किसी जोड़े का नहीं बल्कि समझ का प्रेम है जो एक बहिष्कृत मनुष्य को अंतत: स्वीकारता है। जब गोधन पंचलाइट जलाता है, तब वह सिर्फ टोली को रोशन नहीं करता वह मनुष्य की आत्मा में फंसी कालिख को भी मिटा देता है। जहां दृश्य मौन हो जाते हैं और प्रकाश बोल उठता है। छोटे-छोटे बच्चों के द्वारा नाटक में हास्य, प्रेम और सिनेमा के गानों का सहारा लेकर इसे रोचक बनाने का प्रयास किया है। कलाकारों में शिवप्रकाश, सुप्रिया, अवनीश, पंखुरी, अर्पिता, हरिओम, घनश्याम, आरजू, प्रथमेश रहे।

तीसरी प्रस्तुति मुंशी प्रेमचंद की रचना को सूरज प्रताप सिंह के निर्देशन में दिल्ली पब्लिक स्कूल के बच्चों ने प्रस्तुत किया। यह कहानी इंसान और जानवर के बीच के उस आत्मिक संबंध को दर्शाती है जो भाषा से नहीं, भावना से जुड़ता है। कहानी के जरिए बालकलाकारों ने संदेश दिया कि सच्चाई और वफादारी कभी व्यर्थ नहीं जाती, चाहे परिस्थिति कैसी भी क्यों न हो? ब्रेख्यितन शैली में प्रस्तुत नाटक की शुरूआत दो नट-नटी के हास्य और संवाद से हुई। 

कहानी में गांव की मिट्टी की खुशबू, हास्य की लय, लोकगीतों का रस और भावना की गहराई देखने को मिली। नाटक आधुनिक थिएटर के सभी तत्वों और दृश्य काव्य को मिलाकर टोटल थिएटर के रूप में मंचित किया गया। कलाकारों में आरवी, इंशिरा, मानवी, अद्वैत, सिद्धांत, पहल, जयवर्धन, अनंत व जैतिक ने भूमिका निभाई।

आज के नाटक : राम दूत अंगद और गगन दमाम बाज्यों।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें