बीएचयू गेट के पास होलिका दहन
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मंगलवार को शहर भर में हुआ होलिका दहन
होली और होलिका दहन के संशय के बीच काशी की जनता ने मंगलवार को होलिका दहन किया। होलिका दहन के साथ ही फाग का राग गूंजा तो रंग भी बरसे। फिजाओं में गुलाल-अबीर उड़ाकर लोगों ने एक दूसरे को होली की शुभकामनाएं दीं। मंगलवार की शाम को शहर से लेकर गांव तक होलिकाएं जलाई गईं। पहले दिन जहां 30 फीसदी होलिकाएं जलीं तो वहीं सात मार्च की शाम को 70 फीसदी होलिकाएं दहन की गईं।
मंगलवार की दोपहर से ही होलिका दहन की तैयारियां शुरू हाे गईं। होलिका दहन के लिए उपले, कंडे और लकड़ियों के साथ ही होलिका की प्रतिमाएं भी रखी गईं। जहां पहले से ही तैयारियां पूरी हो गई थीं, वहां पर पूजन किया गया। होलियारों की टोली भी दोपहर से ही मोहल्लों में घूम-घूमकर फाग गा रही थीं। शाम ढलने के साथ ही होलिकाओं के आसपास लोगों की जुटान शुरू हो गई। शाम को 5:40 बजे पूर्णिमा समाप्त होते ही होलिका दहन का सिलसिला शुरू हो गया। वहीं जहां पर सोमवार की मध्य रात्रि में होलिका दहन हुआ था, वहां भी दोबारा होलिका दहन की गई। रात 10 बजे तक शहर से लेकर गांव तक होलिकाओं में आग लग चुकी थी। इसके साथ ही होली का हुड़दंग भी शुरू हो गया। अस्सी से लेकर राजघाट, चेतगंज, अस्सी, बीएचयू, भगवानपुर, रोहनिया, सारनाथ, राजातालाब सहित सभी इलाकों में होलिका दहन किया गया।