वे डंडा जरूर चला सकते हैं। हालांकि, उनकी जिम्मेदारी होती है कि वे नोटिस देने के साथ-साथ करदाताओं की सामान्य समस्याओं को दूर कराएं। टैक्स प्रोफेेशनल को भी गाइड करें, क्योंकि टैक्स प्रोफेेशनल कोच की तरह होते हैं। उन्होंने कहा कि टैक्स व सेस अलग-अलग जमा कराए जाते हैं।
जो जिस मद के लिए वसूला जा रहा है, उसमें उसका इस्तेमाल हो रहा या नहीं, इसकी निगरानी भी अधिवक्ताओं को करनी चाहिए। इस मौके पर टैक्स बार एसोसिएशन के पदाधिकारी अशोक कुमार सिंह, हरिओम शरण श्रीवास्तव, अशोक कुमार सिंह, रमेश गिनोडिया, सुशील कुमार श्रीवास्तव, शरद त्रिपाठी, बीएन राय आदि मौजूद रहे।
अधिवेशन में विशिष्ट अतिथि के रूप में हिस्सा लेने आए इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति पीयूष अग्रवाल ने कहा कि जीएसटी में अभी सुधार की जरूरत है। विशेषकर जुर्माने की जो धारणाएं हैं, वह बहुत दुश्कर हैं। उन्हें समझनेे में परेशानी हो रही है। इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति डॉ. कौशल जयेंद्र ठाकर ने कहा कि टैक्स ऐसे लेना चाहिए, जिससे जनता को प्रताड़ित न होना पड़े। जुर्माना ही वसूलना चाहिए। जेल नहीं भेजना चाहिए।
इलाहाबाद उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश राजेश बिंदल ने कहा कि बनारस में बहुत आकर्षण है, क्योंकि यहां बाबा विश्वनाथ और संकट मोचन मंदिर है। मैं, बनारस आने का मौका कभी नहीं छोड़ता। कार्यक्रम के बाद उन्होंने बनारस रेल इंजन कारखाना का भ्रमण किया। बरेका लोको असेंबली शॉप के मीटिंग हॉल में बैठक के दौरान बरेका महाप्रबंधक अंजली गोयल ने न्यायमूर्तियों को लोको उत्पादन की गतिविधियों, सुविधाओं व बरेका में चल रही परियोजनाओं के साथ ही उत्पादन की तकनीकी प्रक्रिया की जानकारी दी।