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बीएचयू की रिसर्च एसोसिएट डॉ. छवि तिवारी को ‘सुपर वुमेन’ सम्मान

Sun, 08 Mar 2015 02:15 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, वाराणसी
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वाराणसी। देश की 50 फीसदी महिलाएं हर साल एनीमिया की शिकार होती हैं। इससे बचने के लिए उनको आयरन की गोलियों का सेवन करना पड़ता है। महिलाओं और बच्चों को इस समस्या से निजात दिलाने का उपाय बीएचयू की रिसर्च एसोसिएट डॉ. छवि तिवारी ने खोज निकाला है। उन्होंने गेहूं की ऐसी प्रजाति विकसित की है जिसमें एनीमिया रोधक क्षमता होगी। इसका नाम ‘जस्ता युक्त गेहूं’ रखा गया है। इस उपलब्धि के लिए डॉ. छवि को मैक्सिको में अंतरराष्ट्रीय गेहूं एवं मक्का संस्थान (सिमिट) की ओर से ‘सुपर वुमेन’ के सम्मान से नवाजा गया है। यह पुरस्कार उन्हें महिला दिवस के उपलक्ष्य में गेहूं के क्षेत्र में विश्व स्तर पर शोध कार्य के लिए दिया गया है।
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बीएचयू के कृषि विज्ञान संस्थान के जेनेटिक्स एंड प्लांट ब्रीडिंग विभाग में चल रही परियोजना हारवेस्ट प्लस में रिसर्च एसोसिएट पद पर कार्यरत कृषि विज्ञानी डॉ. छवि तिवारी ने कुपोषण दूर करने के लिए गेहूं में सूक्ष्म पोषक तत्व जिंक की मात्रा बढ़ाने के लिए शोध किया है। इस गेहूं के सेवन से कुपोषण की समस्या दूर होगी ओर एनीमिया की बीमारी से लोग बच सकेंगे। डॉ. छवि ने बताया कि देश

में 50 फीसदी महिलाएं और बच्चे एनीमिया के शिकार होते हैं। यह गेहूं इसे दूर करने में कारगर होगा। इस ‘जस्ता युक्त गेहूं’ का बीज जल्द ही बाजार में उपलब्ध होगा। इसके लिए केंद्र सरकार से अनुमति के लिए जरूरी पत्र भेजा जा चुका है। मैक्सिको में अंतरराष्ट्रीय गेहूं एवं मक्का संस्थान (सिमिट) की ओर से विश्व की कुल ऐसी 12 महिलाओं को यह सम्मान दिया गया है। जिसमें डॉ. छवि देश की पहली ऐसी महिला कृषि विज्ञानी हैं जिन्हें यह सम्मान मिला है।
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