सूर्य की उपासना का महापर्व छठ मंगलवार को नहाय खाय के साथ शुरू होगा। गंगा के 84 घाट, 63 कुंड और तालाबों पर छठ की वेदियां सजने लगी हैं। चार दिवसीय महापर्व के दौरान महिलाएं संतान की लंबी आयु के लिए 36 घंटे का निर्जला व्रत रखेंगी। छठ का समापन आठ नवंबर को उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देकर होगा।
ज्योतिषाचार्य ऋषि द्विवेदी ने बताया कि पंचांग के अनुसार डाला षष्ठी या कार्तिक शुक्ल षष्ठी तिथि छह नवंबर को रात 9:37 बजे लग रही है और सात नवंबर रात 9:02 बजे तक रहेगी। सात नवंबर को सूर्यास्त शाम 5:28 मिनट पर होगा। वहीं आठ नवंबर को सुबह 6:32 बजे सूर्योदय होगा।
अरुणोदय काल में द्वितीय अर्घ्यदान के बाद व्रत का पारण होगा। सात नवंबर के दिन शाम को छठ का पहला अर्घ्य दिया जाएगा। सुबह का अर्घ्य अगले दिन आठ नवंबर को दिया जाएगा। इस बार कार्तिक शुक्ल षष्ठी पर यायी जय योग और रवि योग का निर्माण हो रहा है। ये दोनों योग पुण्य की अभिवृद्धि कराने वाले होंगे। मां सीता से आशीर्वाद लेकर दानवीर कर्ण ने भी छठ पूजा की थी।