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पं. छन्नूलाल: बेटे और बेटियां अलग-अलग करेंगे तेरहवीं, काशी विद्वत परिषद ने कहा- आत्मा को शांति नहीं मिलेगी

Sat, 11 Oct 2025 12:38 PM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

पद्मविभूषण पं. छन्नूलाल मिश्र की तेरहवीं को लेकर उनके बेटे और बेटी के बीच विवाद हो गया। बेटे का आरोप है कि पिताजी की संपत्ति बेच दी गई और मुख्यमंत्री से भी नकली रिश्तेदारों को मिलवाया गया था।
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पद्मविभूषण पं. छन्नूलाल की तेरहवीं पर विवाद। - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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पद्म विभूषण पं. छन्नूलाल मिश्र के निधन और अंतिम संस्कार के बाद तेरहवीं संस्कार पर पारिवारिक विवाद शुरू हो गया है। बेटे और बेटियां अलग-अलग तेरहवीं संस्कार करने जा रहे हैं। 14 अक्तूबर को शहर में दो स्थानों पर पं. छन्नूलाल मिश्र का तेरहवीं संस्कार संपन्न होगा। 

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दूसरी तरफ, काशी विद्वत परिषद ने दो तेरहवीं संस्कार को गलत बताया है। परिषद की तरफ से कहा गया कि यह धर्मशास्त्रों के विरुद्ध है। दो तरह के विधान से मृत आत्मा को शांति नहीं मिलती है। 

काशी विद्वत परिषद के राष्ट्रीय महामंत्री प्रो. रामनारायण द्विवेदी ने कहा कि इस तरह के कर्म से पितृसत्ता प्रतिकूल होती है। पितृगणों का आशीर्वाद नहीं मिलता है। मृत आत्मा को शांति नहीं मिलती है। इसका वर्णन श्राद्ध तत्व पर्व निर्णय ग्रंथों और श्राद्ध तत्व प्रकाशिका में मिलते हैं। 

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दो अक्तूबर को हुआ था पं. छन्नूलाल मिश्र का निधन

इन ग्रंथों में स्पष्ट उल्लेख है कि मृतक व्यक्ति के तेरहवीं संस्कार को परिवार के सभी जन मिलकर संपन्न करें। अलग-अलग स्थान पर तेरहवीं संस्कार से मृत आत्मा को शांति मिलती है। यह परिजनों के लिए भी उचित नहीं है। हिंदू धर्मशास्त्रों में इस तरह से तेरहवीं करने का उल्लेख नहीं मिलता है। 

पं. छन्नूलाल मिश्र की तेरहवीं 14 अक्तूबर को पुत्र रामकुमार मिश्र व बेटी ममता मिश्र दुर्गाकुंड स्थित हनुमान प्रसाद पोद्दार महाविद्यालय में करेंगे। इसी तरह से छोटी बेटी डॉ. नम्रता मिश्र रोहनिया स्थित आवास पर तेरहवीं का संस्कार करेंगी। दोनों तरफ से तेरहवीं के कार्ड छपवाए गए हैं। इसका वितरण भी किया जा रहा है। पं. छन्नूलाल मिश्र के परिचितों, शुभचिंतकों, रिश्तेदारों, शिष्यों को कार्ड भेजे जा रहे हैं। इससे सब परेशान हैं। उनका कहना है कि किसके कार्यक्रम में शामिल हों, इस पर संशय है। 

बेटे और बेटी के कार्ड में भी है अंतर : छोटी बेटी डॉ. नम्रता मिश्र के कार्ड में दसवां से तेरहवीं तक आमंत्रण दिया गया है। वहीं, बेटे पं. रामकुमार मिश्र के कार्ड में सिर्फ त्रयोदशाह एवं भंडारा प्रसाद 14 अक्तूबर का जिक्र है। 

पिताजी की जानकारी के बिना नहीं बेची जमीन : डॉ. नम्रता ने वीडियो संदेश में कहा कि मैंने पिताजी की जानकारी के बिना जमीन नहीं बेची है। भइया बेवजह का तमाशा खड़ा कर रहे हैं। मैंने फर्जी रिश्तेदारों को नहीं, चचेरी बहनों को मुख्यमंत्री से मिलवाया था। 

भैया अपने परिवार के साथ जा चुके थे तो मैं कैसे उनसे मिलवाती। भैया ने दुष्प्रचार करना शुरू कर दिया कि मैं पिताजी की विरासत को हथियाना चाहती हूं। संगीत का घराने की विरासत बेटे-बेटी नहीं शिष्य परंपरा से चलती है। मैं तो शिक्षण के कार्य से जुड़ी हूं। मेरा रास्ता अलग है। भैया की बातें तार्किक नहीं हैं।
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निर्णय लेने में भैया ने कर दी देर
पंडित छन्नूलाल की बेटी डॉ. नम्रता मिश्रा ने वीडियो संदेश जारी करके कहा कि मुझे बहुत खुशी हुई कि रामकुमार भैया दसवां से तेरहवीं तक के कर्मकांड करने के लिए काशी आ रहे हैं। पिंडदान का अधिकार उनको और उनके पुत्र को है लेकिन उन्होंने निर्णय लेने में विलंब कर दिया। उन्होंने नौवें दिन तेरहवीं संस्कार करने की घोषणा की। मैं तब तक पांच सौ कार्ड वितरण कर चुकी थी और मुख्यमंत्री को भी आमंत्रित कर चुकी थी। 

आजमगढ़ में भी पैतृक स्थान पर जाकर मैं, निमंत्रण दे चुकी हूं। ब्रह्मभोज और भंडारा दोनों स्थानों पर होगा। भैया दुर्गाकुंड से करेंगे और मैं रोहनिया से। शहर के लोग और पिताजी के शिष्य जिनके लिए दुर्गाकुंड जाना सुविधाजनक होगा वो वहां जा सकते हैं। जो बाहर से मिर्जापुर से आने वाले हैं उनके लिए रोहनिया सुविधाजनक होगा। 
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