परमधाम आश्रम में विनोबा भावे के साथ शतरंज खेलते दुर्गा प्रसाद।
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रोहित ने बताया कि महाकुंभ के दौरान दिव्या अपनी मां और बड़ी बहन के साथ प्रयागराज आई थी। इसके बाद उसकी मां और बड़ी बहन, पिता जटाशंकर शर्मा से मिलने के लिए घर आई थीं। बड़े भाई जय शर्मा नम्रता और दिव्या से मिलने नागपुर गए हैं। उन्होंने बताया कि बचपन से ही दिव्या प्रतिभावान थी और उसे शतरंज खेलने का शौक था। उन्होंने कहा कि हमें दिव्या पर गर्व है।