विशाल संघ के साथ काशी में प्रथम बार पधारीं गुरुमति माता के सानिध्य में जैन धर्म के 23वें तीर्थंकर भगवान पारसनाथ की जन्मस्थली जगमग हो रही है। शुक्रवार को विश्व शांति के लिए पूजा हुई। गुरुमति माता का प्रवचन हुआ। उन्होंने कहा कि मनुष्य का सबसे बड़ा धर्म परोपकार होता है। वह परोपकार कर अपने जीवन को सफल कर सकता है। प्रभु स्वयं के अंदर हैं। पहचाने की जरूरत है। दिगंबर जैन समाज काशी के उपाध्यक्ष राकेश जैन ने बताया कि जैन धर्म के 11वें तीर्थंकर भगवान श्री श्रेयांशनाथ की जन्मस्थली में गुरुमति माता संग दल आया है। जो 25 जनवरी को सारनाथ जैन मंदिर से मैदागिन जैन मंदिर में दर्शन करते हुए भगवान पारसनाथ की जन्मस्थली भेलूपुर पर पहुंचेंगे।