मौसम में तेजी से हो रहे बदलाव में जरा सी लापरवाही बीमार कर दे रही है। दिन में तीखी धूप और गर्म हवाओं के चलने के साथ ही तापमान में बढ़ोतरी से हीट स्ट्रोक का खतरा बढ़ा है। इस वजह से अस्पतालों की ओपीडी में मौसमी बीमारी से पीड़ित भी अधिक पहुंच रहे हैं। किसी को जुकाम है तो किसी को पेट दर्द की शिकायत है।इधर आठ-दस दिनों से सूरज की तपिश ज्यादा बढ़ी है। सुबह दस बजे के बाद ही घर से बाहर निकलना मुश्किल हो गया है। बुधवार को मंडलीय अस्पताल में फिजिशियन, बाल रोग विभाग की ओपीडी में भीड़ देखने को मिली। डॉक्टर की सलाह पर लोग जांच कराने भी पहुंचे। डॉक्टरों के अनुसार ऐसे मौसम में हीट स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से अस्पतालों में जगह-जगह फ्लेक्स लगवाकर लोगों को हीट स्ट्रोक के कारण, बचाव के उपाय के प्रति भी जागरूक किया जा रहा है।
कम उम्र के बच्चों का रखें विशेष ध्यान
गर्मी के मौसम में बड़ों की तुलना में बच्चों की सेहत पर अधिक सतर्कता बरतने की जरूरत होती है। ओपीडी में इन दिनों 30 से 40 बच्चे पेट में दर्द, उल्टी, दस्त की शिकायत लेकर आ रहे हैं। इनमें दस साल से कम उम्र वाले बच्चों की संख्या अधिक है। बच्चों के खानपान पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी जा रही है। - डाॅ. चंद्रप्रकाश गुप्ता, बाल रोग विशेषज्ञ, मंडलीय अस्पताल
डायरिया की समस्या बता रहे हैं लोग
ओपीडी में इन दिनों हीट स्ट्रोक से पीड़ित अधिक आ रहे हैं। इसमें बुजुर्गों की तुलना में 20 से 30 साल के बीच के युवाओं की संख्या अधिक हैं। किसी को सन बर्न की शिकायत है तो कोई उल्टी, दस्त की परेशानी बता रहा है। संतुलित भोजन और शरीर में पानी की मात्रा कम न होने की सलाह दी जा रही है। लोगों को अधिक तेल-मसाले युक्त भोजन से परहेज करना चाहिए। - डॉ. पीके सिंह, फिजिशियन, दीनदयाल अस्पताल
क्या करें
हीट स्ट्रोक के समय तुरंत संबंधित व्यक्ति को छांव वाली जगह ले जाएं।
शरीर को गीले कपड़े से स्पंज करना चाहिए।
ओआरएस का घोल और नींबू का पानी नमक के साथ देना चाहिए।
शरीर के तापमान को ठंडे पानी से कम करना चाहिए।
प्याज को पीस कर पैरों के तलवे में लगाना चाहए।
क्या न करें
शरीर में पानी की मात्रा कम न होने दें।
अधिक तेल-मसाले वाला भोजन करने से बचें।
बिना सिर ढके तेज धूप में न निकलें।
बिना चिकित्सक की सलाह के कोई भी दवा न लें।