जनगणना का संचालन डिजिटल माध्यम से किया जाएगा। पहली बार नागरिकों को स्व-गणना विकल्प प्रदान किया गया है। इसके तहत राज्य में जनगणना के क्षेत्रीय कार्य आरंभ होने से 15 दिन पूर्व यानी 7 से 21 मई 2026 तक सभी नागरिक सेल्फ एन्युमरेशन पोर्टल एवं मोबाइल ऐप के माध्यम से ऑनलाइन प्रश्नावली भरकर अपनी जनगणना स्वयं कर सकते हैं। सभी नगर निकायों एवं ग्रामों के जीआईएस-आधारित मानचित्रों और गणना ब्लॉक तैयार करने हेतु डिजिटल एप का उपयोग किया जाएगा।
बैठक में निदेशक जनगणना कार्य, उत्तर प्रदेश द्वारा जनगणना की प्रक्रिया, समय-सीमा एवं जनगणना-2027 की कार्ययोजना पर विस्तृत प्रस्तुतिकरण दिया गया। जनगणना से संबंधित विभिन्न विषयों, कार्ययोजना एवं कार्य रोडमैप पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।
शीतल वर्मा ने कहा कि जनगणना के माध्यम से सामाजिक, आर्थिक एवं आवासीय स्थिति से संबंधित विस्तृत जानकारी एकत्र की जाएगी, जो भविष्य की विकास योजनाओं एवं नीति निर्माण का आधार बनेगी। उन्होंने बताया कि जनगणना से प्राप्त आंकड़े देश की आधारभूत संरचना के विकास के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होंगे।
मकानों की गणना में 33 सूचनाएं ली जाएंगी
मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना के दौरान प्रगणक द्वारा भवन के उपयोग, निर्माण में प्रयुक्त सामग्री, कमरों की संख्या, स्वामित्व की स्थिति, शौचालय की उपलब्धता, प्रकाश का मुख्य स्रोत, खाना पकाने में प्रयुक्त ईंधन का प्रकार, एलपीजी/पीएनजी कनेक्शन की उपलब्धता, परिवार द्वारा उपभोग किए जाने वाले मुख्य अनाज तथा फोन, वाहन, टेलीविजन एवं इंटरनेट जैसी परिसंपत्तियों से संबंधित कुल 33 प्रकार की सूचनाओं के विषय में जानकारी ली जाएगी। उन्होंने दावा किया कि यह सूचनाएं गोपनीय रहेंगी।
15 फरवरी से 35 हजार कर्मियों का प्रशिक्षण शुरू होगा
जनगणना कार्य से जुड़े सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों को 15 फरवरी से चरणबद्ध प्रशिक्षण प्रदान किए जाने का कार्य शुरू होगा। जनगणना कार्य के लिए वाराणसी जनपद में लगभग 10 हजार, जौनपुर में 11 हजार, गाजीपुर में लगभग 9 हजार और चंदौली में लगभग 5 हजार कार्मिकों की ड्यूटी लगाई जाएगी। मंडलायुक्त एस. राजलिंगम ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिए कि जनगणना कार्य को समयबद्ध, पारदर्शी एवं त्रुटिरहित ढंग से संपन्न कराने हेतु अभी से सभी आवश्यक तैयारियां पूरी कर लें।