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जब पुत्र के ही खिलाफ करा दी सीबीआई जांच

Thu, 19 Jan 2017 02:21 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
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लोकबंधु राजनारायण, धर्मेंद्र, शत्रुघ्न सिन्हा - फोटो : अमर उजाला
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लोकबंधु राजनारायण की राजनीतिक परंपरा सामाजिक न्याय के ऊंचे मानकों पर स्थापित थी। अब दिल्ली-लखनऊ में सत्ताशीर्ष पर बैठे राजनेताओं से मिलने में महीनों एड़ियां घिसनी पड़ती हैं। तब वंशवाद, परिवारवाद, क्षेत्रवाद, जातिवाद की इतनी राजनीति नहीं थी। सामाजिक न्याय के पक्षधर लोकबंधु अपने घर-परिवार के लिए नहीं जिए, वह सबके थे। उनके लिए देश का हर बच्चा, हर नागरिक अपना था। चाहे घर हो या समाज या फिर दल, वह गलत नीतियों के विरोधी थे। बंगले बनवाना, रिश्तेदारों, परिवार के सदस्यों को नौकरी या टिकट दिलवाना तो दूर उन्होंने एक बार अपने पुत्र के ही खिलाफ सीबीआई जांच करवा दी थी। इस अंक में पढ़िए उनके राजनीतिक जीवन से जुड़े दिलचस्प पहलुओं के बारे में...।
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लोहिया-राजनारायण की राजनीतिक परंपरा कितनी बेपटरी हो चुकी है, यह अब किसी से छिपा नहीं रहा। नेता अपनों के ही बारे में सोचते हैं। तब ऐसा नहीं था। उस दौर में राजनारायण जी के आसपास किसी काम के लिए फटकने की परिवार के लोगों में हिम्मत नहीं थी। बुधवार को श्रीरामनगर कॉलोनी स्थित आवास पर उनके छोटे पुत्र ओमप्रकाश ने लोकबंधु के आदर्श राजनीतिक जीवन से जुड़े कई रोचक संस्मरणों को साझा किया। 
 
ओमप्रकाश बताते हैं कि मैंने एक अफसर की पैरबी पर नेताजी से छिपाकर न्यू बैंक ऑफ इंडिया में डेवलपमेंट अफसर की नौकरी हासिल की थी। उन दिनों देवीलाल के पुत्र ओमप्रकाश चौटाला के साथ एक दिन फरीदाबाद डेवलपमेंट आफिस में डिपाजिट मांगने चला गया। किसी तरह यह बात विरोधी दल के नेताओं को पता चल गई। कम्युनिस्ट पार्टी के नेताओं ने कोलकाता में राजनारायण पर आरोप लगा दिया कि उनके कहने पर देवीलाल ने हरियाणा सरकार का पैसा न्यू बैंक ऑफ इंडिया में जमा कराया है। इसके बदले में अपने बेटे को उसी बैंक में नौकरी दिलवा दी है। राजनारायण ने आरोप पर पुत्र ओमप्रकाश के खिलाफ सीबीआई जांच कराने का एलान किया।
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    सीबीआई जांच में आरोप झूठा निकला। पता चला कि फरीदाबाद डेवलपमेंट ऑफिस से ओमप्रकाश को डिपाजिट के लिए पैसा दिया ही नहीं गया था।  वह कहते हैं कि उस दौर में वह चाहे होते तो शायद लखनऊ, दिल्ली से लेकर तमाम महानगरों में उनके आलीशान मकान होते लेकिन उनके जाने के बाद लोन लेकर हम लोगों को घर बनवाना पड़ा। वह बताते हैं कि इमरजेंसी के दौरान जब वह हिसार जेल में बंद थे, तब एक दिन मैं उनसे मिलने पहुंचा। वहां सीआईडी के कई अफसर, जेलर मौजूद थे। अनुमति मिलने के बाद मैं जैसे ही नेताजी के सामने पहुंचा। उन्होंने पूछा? आपका नाम क्या है? सीआईडी अफसर खड़ा हो गया? मुझसे बोला, आप इनके पुत्र नहीं हैं। इनसे नहीं मिल सकते। नेताजी ने अफसर से कहा कि-मैं इंदिरा नहीं हूं कि मेरे राजीव-संजय दो ही बेटे हैं। मेरे देश के करोड़ों बच्चे मेरी संतान की तरह हैं। इस पर अफसरों की बोलती बंद हो गई। फिर ओमप्रकाश की नेताजी से मुलाकात हो सकी।   
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