फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सीबीआई की बड़ी कार्रवाई: 1.70 लाख रुपये रिश्वत लेने के आरोप में रेलवे के सीनियर डीएमएम गिरफ्तार, फाइलें जब्त

Fri, 24 Jul 2026 09:38 AM IST
Pragati Chand अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

Varanasi Crime News: सीबीआई ने बनारस रेल मंडल में वरिष्ठ मंडल सामग्री प्रबंधक नितेश अग्रवाल को 1.70 लाख रुपये घूस लेते गिरफ्तार कर लिया। सीबीआई अब बैंक से जुड़े दस्तावेजों को खंगाल रही है। 
विज्ञापन
आरोपी अधिकारी नितेश अग्रवाल - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

सीबीआई ने बृहस्पतिवार की देर रात पूर्वोत्तर रेलवे वाराणसी मंडल के वरिष्ठ मंडल सामग्री प्रबंधक (सीनियर डीएमएम) नितेश अग्रवाल को बरेका स्थित आवास से 1.70 लाख रुपये घूस लेने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया। नितेश ने फर्नीचर ठेकेदार से बिल पास करने के लिए घूस मांगी थी। सीबीआई ने रेलवे अधिकारी के कार्यालय और आवास से कई निविदाओं से जुड़ीं फाइलें, ढाई लाख रुपये नकद बरामद किए हैं।

विज्ञापन


सीबीआई की टीम शुक्रवार की सुबह आरोपी रेल अधिकारी को अपने साथ लखनऊ ले गई है। नितेश ने पिछले 29 जून को ही पदभार ग्रहण किया था। वह मूल रूप से हाथरस का रहने वाला है। सीबीआई ने प्राथमिकी दर्ज करके आरोपी को अदालत में पेश किया जहां से न्यायिक अभिरक्षा में सात अगस्त तक जेल भेज दिया गया।

वाराणसी के बड़ागांव थाना क्षेत्र के हरहुआ काजीसराय गढ़वा गांव निवासी संदीप कुमार सिंह ने सीबीआई लखनऊ में शिकायत दर्ज कराई थी। संदीप ने कहा था कि वह पूर्वोत्तर रेलवे वाराणसी मंडल में फर्नीचर की सप्लाई करता है। विनायक इंटरप्राइजेज के नाम से फर्म है। 
विज्ञापन


फरवरी से जून 2026 के बीच 9.47 लाख का फर्नीचर जेम पोर्टल के माध्यम से सप्लाई किया था। लगभग आठ लाख रुपये का भुगतान कर दिया गया था। 1.47 लाख रुपये के बकाया भुगतान और नए टेंडर के संबंध में 15 जुलाई को सीनियर डीएमएम नितेश अग्रवाल से मुलाकात की। आरोप लगाया कि सीनियर डीएमएम नितेश अग्रवाल ने फरवरी से जून तक के फर्नीचर सप्लाई और उसके भुगतान पर 1.70 लाख रुपये रिश्वत की मांग की। धमकी दी कि रुपये नहीं मिले तो आगे कोई भी टेंडर विनायक इंटरप्राइजेज को नहीं मिलेगा।

नोट की गड्डी में केमिकल लगाकर रेल अधिकारी को दिया
फर्नीचर ठेकेदार की शिकायत पर सीबीआई लखनऊ की एंटी करप्शन ब्यूरो की टीम ने जाल बिछाया और नोट की गड्डी में केमिकल लगाकर फर्नीचर ठेकेदार को दिया। बृहस्पतिवार की रात ही बरेका स्थित बंगला नंबर 78 पर ठेकेदार संदीप कुमार सिंह ने जैसे ही नोटों की गड्डी नितेश अग्रवाल को थमाई वैसे ही सीबीआई की टीम पहुंच गई। टीम ने आरोपी अधिकारी को रंगेहाथ गिरफ्तार कर लिया। सीबीआई ने रेल अधिकारी के आवास से ढाई लाख रुपये नकद बरामद किए हैं। टेंडर से जुड़ीं फाइलें और संपत्तियों के दस्तावेज भी बरामद किए गए हैं। 

सीबीआई की टीम बृहस्पतिवार की रात ही नितेश को लेकर लहरतारा स्थित मंडल रेल प्रबंधक कार्यालय में सीनियर डीएमएम के कार्यालय भी पहुंची। टीम ने टेंडर से जुड़ीं फाइलें खंगाली और कुछ फाइलों को अपने कब्जे में ले लिया। नितेश के परिजनों और उससे जुड़े कर्मचारियों से पूछताछ भी की गई है। संपत्ति और बैंक खातों से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज भी जब्त किए गए हैं। सीबीआई के विवेचक गौरव प्रकाश के नेतृत्व में गिरफ्तारी की कार्रवाई हुई है।

डीआरएम कार्यालय में नौकरी, सिफारिश पर बरेका में पाया बंगला
विभागीय सूत्रों के अनुसार वाराणसी मंडल में क्लास वन रैंक के एक अधिकारी की सिफारिश से नितेश अग्रवाल की तैनाती हुई थी। पहले वह बरेली में तैनात था। 25 दिन के अंदर ही उक्त अधिकारी का शह पाकर नितेश अग्रवाल ने जेम पोर्टल पर पंजीकृत ठेकेदारों पर दबाव बनाना शुरू कर दिया था। आरोप है कि पुराने टेंडर में बिल भुगतान पर कमीशन की मांग करता था। रेलवे के आला अधिकारी के प्रभाव पर ही नितेश अग्रवाल को बरेका में एसबीआई के ठीक सामने बंगला नंबर 78 आवंटित किया गया। वह अपनी पत्नी के साथ रहता था। कार्यालय के बाबुओं और चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों को अपने बंगले पर फाइलों के साथ बुलाता था।

सीबीआई के शिकंजे में फंसे रेल अधिकारी, पहले भी हुई गिरफ्तारी
पूर्वोत्तर रेलवे के अलग-अलग मंडलों में भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी के खिलाफ सीबीआई की कार्रवाई लगातार जारी है। साल-दर-साल भ्रष्ट रेल अधिकारियों को गिरफ्तार किया गया। भ्रष्टाचार से अर्जित संपत्तियों का मामला भी सामने आया। सीबीआई ने केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी गति शक्ति परियोजना में बड़ी अनियमितता और घूसखोरी की शिकायत पर पिछले साल जुलाई में ही वाराणसी, लखनऊ में रेलवे अधिकारियों के कई ठिकानों पर एक साथ छापे मारे थे। इस कार्रवाई में कई वरिष्ठ अधिकारी जांच के दायरे में आए थे। सूत्रों के मुताबिक आने वाले दिनों में कुछ और अधिकारियों पर गाज गिर सकती है। उधर, पूर्वोत्तर रेलवे वाराणसी मंडल में भ्रष्टाचार की जड़ें काफी गहरी बताई जा रही हैं। ठेकेदारों से कमीशन पर टेंडर दिलवाने और बिना काम के बिल पास कराने का खेल लंबे समय से चल रहा है।

दो लाख रुपये की रिश्वत लेते सीनियर डीईएन हुआ था गिरफ्तार
अक्तूबर 2024 में सीबीआई की टीम ने डीआरएम कार्यालय लहरतारा में छापा मारा था। कार्रवाई के दौरान वरिष्ठ मंडल अभियंता (सीनियर डीईएन-द्वितीय) सत्यम सिंह पटेल को गोरखपुर के एक ठेकेदार से 2 लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगेहाथों गिरफ्तार किया गया था।
विज्ञापन

सीनियर सेक्शन इंजीनियर चढ़ा था हत्थे
भ्रष्टाचार के खिलाफ इस अभियान की शुरुआत अप्रैल 2024 में हुई थी। सीबीआई ने पूर्वोत्तर रेलवे के ही एक अन्य वरिष्ठ सेक्शन इंजीनियर संजय कुमार को रिश्वत लेने के आरोप में गिरफ्तार किया था।

बरेका में तीन लाख घूस लेते गिरफ्तार हुआ था इंजीनियर
बरेका में वरिष्ठ सिविल इंजीनियर ओमप्रकाश सोनकर को सीबीआई ने 16 सितंबर 2022 में तीन लाख रुपये घूस लेते हुए रंगेहाथ गिरफ्तार किया था। ठेकेदार से बिल पास करने के एवज में घूस की मांग की गई थी। ओमप्रकाश सोनकर की गिरफ्तारी के बाद बरेका के कई अधिकारियों पर गाज गिरी थी। टिकरी निवासी ठेकेदार की शिकायत पर फुलवरिया के राणानगर कॉलोनी स्थित ओमप्रकाश सोनकर के मकान पर छापा पड़ा था। आवास से ही गिरफ्तारी हुई थी।

महिला से नियुक्ति के लिए मांगी थी घूस
वर्ष 2010 में सीबीआई ने बरेका में छापा मारकर मुख्य कार्मिक अधिकारी वीके विहानी को घूस लेते हुए गिरफ्तार किया था। एक महिला की नियुक्ति के मामले में मुख्य कार्मिक अधिकारी वीके विहानी ने घूस की मांग की थी।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें