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सावधान: मोबाइल के ज्यादा इस्तेमाल से बढ़ रहे पीठ-गर्दन में दर्द के मामले, जिला अस्पताल में रोज आ रहे 40 केस

Sat, 01 Nov 2025 07:25 PM IST
प्रगति चंद अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

Varanasi News: जिला अस्पताल के फिजियोथेरेपिस्ट विनय कुमार तिवारी के मुताबिक, इस तरह की अधिकतर समस्याएं नौकरी पेशा लोगों में हो रही है। बच्चे भी ज्यादा मोबाइल के इस्तेमाल से इसका शिकार हो रहे हैं।
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mobile - फोटो : adobe stock
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विस्तार
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घंटों कुर्सी पर बैठकर सिर नीचे करके मोबाइल का इस्तेमाल करने से पीठ और गर्दन की हड्डी में दर्द की शिकायत हो रही है। जिला अस्पताल के ऑर्थो और फिजियोथेरेपी विभाग में इस तरह के औसत 40 केस रोज आ रहे हैं। इनमें अधिकतर युवा हैं। जिला अस्पताल के फिजियोथेरेपिस्ट विनय कुमार तिवारी के मुताबिक, इस तरह की अधिकतर समस्याएं नौकरी पेशा लोगों में हो रही है। बच्चे भी ज्यादा मोबाइल के इस्तेमाल से इसका शिकार हो रहे हैं। डॉक्टर लोगों को चिकित्सक उन्हें दवाएं लिखने के साथ ही एक्सरसाइज करने की सलाह दे रहे हैं।

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केस -1
चोलापुर निवासी कृष्ण मुरारी एक प्राइवेट कंपनी में एकाउंटेंट हैं। उनका अधिकतर काम मोबाइल और कंप्यूटर पर होता है। कुछ महीनों पहले उन्हें पीठ में दर्द हुआ। शुरू में उन्होंने दर्द निवारक गोलियां लीं, लेकिन समय के साथ दर्द बढ़ता गया। जिला अस्पताल आने पर चिकित्सकों ने एक्सरे और सिटी स्कैन कराया। उसमें सामने आया कि लगातार सिर झुकाकर काम करने से उनके रीढ़ की हड्डी कमजोर हो रही है। डॉक्टर ने उन्हें दवा के साथ ही व्यायाम और योग की सलाह दी।

केस -2
सारनाथ के इंटरमीडिएट के छात्र सौरभ उपाध्याय को प्रतिदिन 1-2 घंटे सोशल मीडिया पर बिताने की आदत थी। कुछ दिनों बाद गर्दन में दर्द शुरू हुआ। जिला अस्पताल में एक्सरे और अन्य जांच में हड्डियों में कमजोरी सामने आई। डॉक्टर ने मोबाइल और सोशल मीडिया से दूर रहते हुए दवा और व्यायाम की सलाह दी।

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उपाय

  • बैठते समय पीठ सीधी रखें और स्क्रीन को आंखों के बराबर रखें ताकि गर्दन नीचे न झुके।
  • लगातार बैठे रहने की आदत छोड़ें। हर आधे घंटे में उठकर एक से दो मिनट टहलें या हल्का स्ट्रेच करें।
  • मोबाइल देखने के दौरान सिर झुकाने के बजाय उसे आंखों की ऊंचाई तक उठाएं।
  • आपकी कुर्सी में पीठ को सहारा देने वाला हिस्सा हो और टेबल की ऊंचाई आपके पॉश्चर के अनुकूल हो।
  • रोजाना हल्के एक्सरसाइज जैसे नेक रोटेशन, शोल्डर रोल और कैट-काउ स्ट्रेच करें।
  • दूध, दही, पनीर, अंडे और धूप से मिलने वाला विटामिन-डी रीढ़ को मजबूत बनाता है।
  • लंबे समय तक एक कंधे पर बैग लटकाने से रीढ़ पर दबाव पड़ता है, इसलिए हल्का बैग लें और भार को संतुलित रखें।
  • बहुत नरम गद्दे पर न सोएं। पीठ को सीधा रखने वाला गद्दा चुनें और बहुत ऊंचा तकिया इस्तेमाल न करें।
  • अनावश्यक रूप से मोबाइल या लैपटॉप पर समय न बिताएं। आंखों और शरीर दोनों को आराम दें।
  • ताड़ासन, भुजंगासन, शवासन और प्राणायाम जैसे योगासन रीढ़ की लचीलापन और मजबूती को बढ़ाते हैं।

क्या बोले विशेषज्ञ
सिर झुकाकर लंबे समय तक बैठना धीरे-धीरे टेक्स्ट नेक सिंड्रोम जैसी समस्याओं को जन्म देता है। अगर आप समय पर सावधानी नहीं बरतते, तो यह आदत गंभीर स्पाइनल डिसऑर्डर में बदल सकती है। सही पॉश्चर, नियमित व्यायाम और संतुलित जीवनशैली अपनाकर आप अपनी रीढ़ को स्वस्थ रख सकते हैं। -डॉ. प्रेम प्रकाश, आर्थो सर्जन एवं एमएस, दीनदयाल अस्पताल 
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