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गलत सर्जरी का मामला: बीएचयू ट्रामा सेंटर में 14 लोगों पर होगी कार्रवाई, चिकित्सक और कर्मचारी शामिल; जानें खास

Wed, 29 Apr 2026 10:02 PM IST
Aman Vishwakarma अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

Varanasi News: गलत सर्जरी की जांच में जिन कर्मियों के स्तर पर लापरवाही पाई गई है, उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू कर दी गई है। इसमें अस्थि रोग, एनेस्थीसिया, न्यूरोसर्जरी और नर्सिंग विभाग के कुल 14 चिकित्सक और कर्मचारी शामिल हैं। प्रशासन का कहना है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सख्त कदम उठाए जाएंगे।
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आईएमएस बीएचयू का ट्रॉमा सेंटर। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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चिकित्सा विज्ञान संस्थान के ट्रॉमा सेंटर में 7 मार्च को हुई गंभीर चिकित्सकीय लापरवाही के मामले में गठित फैक्ट फाइंडिंग समिति ने अपनी जांच रिपोर्ट कुलपति को सौंप दी है। अब बीएचयू प्रशासन की ओर से इनमें 14 लोगों को दोषी पाया गया है, जिनमें चिकित्सक और कर्मचारी शामिली हैं। बीएचयू प्रशासन की ओर से जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि अस्थि रोग ऑपरेशन थियेटर में मरीज की पहचान में हुई चूक के कारण गलत मरीज पर चीरा लगाने की घटना सामने आई थी, जिसके बाद संस्थान प्रशासन ने पूरे मामले की विस्तृत जांच कराई।

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जांच रिपोर्ट में सामने आया कि दोनों मरीजों का नाम एक ही था और उन्हें एक ही प्री-ऑपरेटिव रूम में रखा गया था, जिससे भ्रम की स्थिति बनी। समिति ने स्पष्ट किया कि ऑपरेशन से पहले संबंधित कर्मचारियों को मरीज की पहचान फाइल के आधार पर पुनः सुनिश्चित करनी चाहिए थी, लेकिन इस प्रक्रिया में लापरवाही बरती गई।

रिपोर्ट के अनुसार, बलिया निवासी 71 वर्षीय राधिका देवी, जिनका ऑपरेशन न्यूरोसर्जरी विभाग में होना था, उन्हें गलती से अस्थि रोग विभाग के ऑपरेशन थियेटर में ले जाया गया। वहां कूल्हे के ऑपरेशन के लिए चीरा भी लगा दिया गया। हालांकि, चिकित्सकीय टीम को तुरंत अपनी गलती का अहसास हो गया और बिना किसी सर्जिकल प्रक्रिया के चीरे को बंद कर दिया गया। मरीज को वापस शिफ्ट करते हुए परिजनों को पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी गई। एक्स-रे जांच में भी यह स्पष्ट हुआ कि हड्डी की कोई सर्जरी नहीं की गई थी।

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इसके बाद निर्धारित प्रक्रिया के तहत मरीज के टांके काटे गए और उनकी स्थिति सामान्य रही। 18 मार्च को उसी मरीज का न्यूरोसर्जरी विभाग में स्पाइनल कॉर्ड ट्यूमर का सफल ऑपरेशन किया गया। यह सर्जरी अत्यंत जटिल और जोखिम भरी थी, जिसके लिए परिजनों की सहमति ली गई थी। ऑपरेशन के बाद मरीज को 10 दिन तक पोस्ट-ऑपरेटिव वार्ड में रखा गया, जहां उनकी स्थिति में सुधार देखा गया।

हालांकि, 27 मार्च की सुबह अचानक हृदयाघात होने से मरीज की हालत बिगड़ गई। उन्हें तत्काल आईसीयू में भर्ती कराया गया, जहां उपचार के दौरान उनकी मृत्यु हो गई। समिति ने स्पष्ट किया है कि कूल्हे में लगाए गए चीरे को मृत्यु का कारण मानना उचित नहीं है, जैसा कि कुछ माध्यमों में बताया जा रहा था। 

दूसरी मरीज वाराणसी निवासी 82 वर्षीय राधिका देवी, की कूल्हे की सर्जरी 9 मार्च को सफलतापूर्वक संपन्न हुई थी। संस्थान प्रशासन ने इस घटना के बाद सुधारात्मक कदम उठाते हुए सभी मरीजों की पहचान सुनिश्चित करने के लिए कलाई पर पहचान टैग अनिवार्य करने का निर्णय लिया है। साथ ही, सर्जरी से पहले बहु-स्तरीय पहचान सत्यापन प्रक्रिया लागू की जा रही है।
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महिला के पोते ने लंका थाने में दी तहरीर, दोषियों पर प्राथमिकी दर्ज करने की मांग
राधिका देवी के पोते मृत्युंजय पाल ने बुधवार को लंका थाने में तहरीर देकर दोषी डॉक्टरों पर मुकदमा दर्ज करने की मांग की है। दो पेज की अपनी तहरीर में मृत्युंजय ने इसके लिए सर्जरी करने वाली टीम में शामिल डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगाया है। साथ ही फैक्ट फाइंडिंग कमेटी की जांच करने वाले डॉक्टर की भूमिका पर सवाल खड़ा करते हुए कार्रवाई की मांग की है। 



इस मामले में लंका थाना प्रभारी राजकुमार ने बताया कि तहरीर मिली है। इस पर नियमानुसार मेडिकल बोर्ड को अवगत कराया जाएगा। मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। मृत्युंजय पाल ने तहरीर में लिखा है कि 7 मार्च को दादी (राधिका देवी) को ऑपरेशन थिएटर में ले जाने के बाद उनसे कोई सहमति नहीं ली गई। जब गलत सर्जरी की जानकारी के बाद पूछताछ की गई तो वहां मौजूद जूनियर डॉक्टरों ने दुर्व्यवहार किया। 

मामले में 1 अप्रैल को आईएमएस निदेशक से शिकायत करने के बाद आर्थो विभाग की जिस डॉक्टरों की टीम ने गलत सर्जरी की, उन्होंने सुलह करने का दबाव भी बनाया, लेकिन न्याय की मांग की जा रही है। मृत्युंजय पाल ने तहरीर में यह भी बताया कि जांच कमेटी के चेयरमैन भी आर्थो की उसी सर्जरी वाली टीम का हिस्सा हैं, जिसने दादी की गलत सर्जरी की। ऐसे में दोषियों पर प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की है।
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