इसके बाद निर्धारित प्रक्रिया के तहत मरीज के टांके काटे गए और उनकी स्थिति सामान्य रही। 18 मार्च को उसी मरीज का न्यूरोसर्जरी विभाग में स्पाइनल कॉर्ड ट्यूमर का सफल ऑपरेशन किया गया। यह सर्जरी अत्यंत जटिल और जोखिम भरी थी, जिसके लिए परिजनों की सहमति ली गई थी। ऑपरेशन के बाद मरीज को 10 दिन तक पोस्ट-ऑपरेटिव वार्ड में रखा गया, जहां उनकी स्थिति में सुधार देखा गया।
हालांकि, 27 मार्च की सुबह अचानक हृदयाघात होने से मरीज की हालत बिगड़ गई। उन्हें तत्काल आईसीयू में भर्ती कराया गया, जहां उपचार के दौरान उनकी मृत्यु हो गई। समिति ने स्पष्ट किया है कि कूल्हे में लगाए गए चीरे को मृत्यु का कारण मानना उचित नहीं है, जैसा कि कुछ माध्यमों में बताया जा रहा था।
दूसरी मरीज वाराणसी निवासी 82 वर्षीय राधिका देवी, की कूल्हे की सर्जरी 9 मार्च को सफलतापूर्वक संपन्न हुई थी। संस्थान प्रशासन ने इस घटना के बाद सुधारात्मक कदम उठाते हुए सभी मरीजों की पहचान सुनिश्चित करने के लिए कलाई पर पहचान टैग अनिवार्य करने का निर्णय लिया है। साथ ही, सर्जरी से पहले बहु-स्तरीय पहचान सत्यापन प्रक्रिया लागू की जा रही है।
महिला के पोते ने लंका थाने में दी तहरीर, दोषियों पर प्राथमिकी दर्ज करने की मांग
राधिका देवी के पोते मृत्युंजय पाल ने बुधवार को लंका थाने में तहरीर देकर दोषी डॉक्टरों पर मुकदमा दर्ज करने की मांग की है। दो पेज की अपनी तहरीर में मृत्युंजय ने इसके लिए सर्जरी करने वाली टीम में शामिल डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगाया है। साथ ही फैक्ट फाइंडिंग कमेटी की जांच करने वाले डॉक्टर की भूमिका पर सवाल खड़ा करते हुए कार्रवाई की मांग की है।
इस मामले में लंका थाना प्रभारी राजकुमार ने बताया कि तहरीर मिली है। इस पर नियमानुसार मेडिकल बोर्ड को अवगत कराया जाएगा। मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। मृत्युंजय पाल ने तहरीर में लिखा है कि 7 मार्च को दादी (राधिका देवी) को ऑपरेशन थिएटर में ले जाने के बाद उनसे कोई सहमति नहीं ली गई। जब गलत सर्जरी की जानकारी के बाद पूछताछ की गई तो वहां मौजूद जूनियर डॉक्टरों ने दुर्व्यवहार किया।
मामले में 1 अप्रैल को आईएमएस निदेशक से शिकायत करने के बाद आर्थो विभाग की जिस डॉक्टरों की टीम ने गलत सर्जरी की, उन्होंने सुलह करने का दबाव भी बनाया, लेकिन न्याय की मांग की जा रही है। मृत्युंजय पाल ने तहरीर में यह भी बताया कि जांच कमेटी के चेयरमैन भी आर्थो की उसी सर्जरी वाली टीम का हिस्सा हैं, जिसने दादी की गलत सर्जरी की। ऐसे में दोषियों पर प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की है।