अग्रिम जमानत पर सुनवाई
अदालत में जमानत अर्जी पर सुनवाई के दौरान अधिवक्ता विकास सिंह ने दलील दिए। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति के विरुद्ध लगाए गए आरोप मात्र से अपराध सिद्ध नहीं हो जाता। अधिवक्ता ने यह भी तर्क दिए कि प्रथम सूचना रिपोर्ट में आरोपित के खिलाफ कोई प्रमाण नहीं है। इसमें यह नहीं दर्शाया गया कि आरोपित ने किसी प्रकार की भूमि या दस्तावेज अपने नाम करवाए हों। अदालत ने पत्रावली का अवलोकन किया और इन दलीलों पर विचार किया। इसके बाद आरोपित वरुणापति उपाध्याय की अग्रिम जमानत अर्जी मंजूर कर ली गई।
मामले में भाजपा नेता का नाम
इस पूरे प्रकरण को लेकर भारतीय जनता पार्टी के जिला उपाध्यक्ष सुरेश सिंह का नाम भी मीडिया की सुर्खियों में रहा था। पत्रावली में सुरेश कुमार सिंह का नाम भी अन्य व्यक्तियों के साथ अभियोजन कथानक में उल्लिखित है। यह दर्शाता है कि इस कथित भूमि हड़पने के मामले में उनका भी नाम शामिल है। हालांकि, लेख में उनकी भूमिका या उन पर लगे आरोपों का विस्तृत विवरण नहीं दिए गया है। उनका नाम इस मामले की गंभीरता को और बढ़ाता है।
शिकायत और आरोप
शिकायतकर्ता प्रमिला मिश्रा ने अपनी प्राथमिकी में विस्तृत आरोप लगाए थे। उन्होंने बताया कि उनके पति की गंभीर बीमारी का फायदा उठाया गया। कुछ लोगों ने उनकी कमजोर स्थिति का लाभ उठाकर संपत्ति हड़पने की साजिश रची। 07 अप्रैल 2026 को लगभग 70 बिस्वा व्यावसायिक भूमि का बैनामा करवा लिया गया। यह भूमि 50 करोड़ रुपये से अधिक की बताई गई है। यह शिकायत इस पूरे मामले का आधार बनी है।