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50 करोड़ की जमीन हड़पने का मामला: आरोपी को कोर्ट से राहत, बीजेपी नेता का नाम चर्चा में; अग्रिम जमानत मंजूर

Wed, 26 Aug 2026 06:12 PM IST
Aman Vishwakarma अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

वाराणसी में 50 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की करीब 70 बिस्वा जमीन हड़पने के आरोप में नामजद वरुणापति उपाध्याय को अदालत से राहत मिली है। अपर जिला जज (षष्ठम) आलोक कुमार की अदालत ने उनकी अग्रिम जमानत मंजूर कर ली। अदालत ने एक लाख रुपये के जमानतदार और बंधपत्र पर रिहाई का आदेश दिया।
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वाराणसी कोर्ट से मिली राहत। - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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50 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की जमीन कथित रूप से हड़पने के मामले में आरोपित वरुणापति उपाध्याय को अदालत से बड़ी राहत मिली है। अपर जिला जज (षष्ठम) आलोक कुमार की अदालत ने उन्हें अग्रिम जमानत पर अवमुक्त करने का आदेश दिए। दरेखू, रोहनिया निवासी उपाध्याय को एक लाख रुपये के एक जमानतदार और बंधपत्र देने पर यह जमानत मिली। बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता विकास सिंह ने अदालत में अपना पक्ष रखा।

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यह मामला शिकायतकर्ता प्रमिला मिश्रा द्वारा रोहनिया थाने में दर्ज प्राथमिकी से संबंधित है। प्रमिला मिश्रा ने आरोप लगाया था कि उनके 65 वर्षीय पति लंबे समय से किडनी की बीमारी से पीड़ित थे। वे नियमित रूप से डायलिसिस करा रहे थे। इसी दौरान कुछ लोगों ने उनकी बीमारी और पारिवारिक परिस्थितियों का अनुचित लाभ उठाया। इन लोगों ने उनकी संपत्ति और आर्थिक संसाधनों पर कब्जा करने की योजना बनाई। 

इस योजना के तहत विशाल मिश्रा, रवि उपाध्याय, वरुणापति उपाध्याय, नितेश राय, सुरेश कुमार सिंह, अजय तिवारी, प्रवीण सिंह, प्रशांत सिंह, अनिल कुमार और सत्यांशु सिंह शामिल थे। इन सभी ने मिलीभगत करके प्रमिला मिश्रा के पति को ले जाकर सात अप्रैल 2026 को लगभग 70 बिस्वा भूमि अपने पक्ष में बैनामा करवा लिया। इस भूमि का व्यावसायिक उपयोग था और इसकी कीमत 50 करोड़ रुपये से अधिक आंकी गई है।

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अग्रिम जमानत पर सुनवाई
अदालत में जमानत अर्जी पर सुनवाई के दौरान अधिवक्ता विकास सिंह ने दलील दिए। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति के विरुद्ध लगाए गए आरोप मात्र से अपराध सिद्ध नहीं हो जाता। अधिवक्ता ने यह भी तर्क दिए कि प्रथम सूचना रिपोर्ट में आरोपित के खिलाफ कोई प्रमाण नहीं है। इसमें यह नहीं दर्शाया गया कि आरोपित ने किसी प्रकार की भूमि या दस्तावेज अपने नाम करवाए हों। अदालत ने पत्रावली का अवलोकन किया और इन दलीलों पर विचार किया। इसके बाद आरोपित वरुणापति उपाध्याय की अग्रिम जमानत अर्जी मंजूर कर ली गई।

मामले में भाजपा नेता का नाम
इस पूरे प्रकरण को लेकर भारतीय जनता पार्टी के जिला उपाध्यक्ष सुरेश सिंह का नाम भी मीडिया की सुर्खियों में रहा था। पत्रावली में सुरेश कुमार सिंह का नाम भी अन्य व्यक्तियों के साथ अभियोजन कथानक में उल्लिखित है। यह दर्शाता है कि इस कथित भूमि हड़पने के मामले में उनका भी नाम शामिल है। हालांकि, लेख में उनकी भूमिका या उन पर लगे आरोपों का विस्तृत विवरण नहीं दिए गया है। उनका नाम इस मामले की गंभीरता को और बढ़ाता है।
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शिकायत और आरोप
शिकायतकर्ता प्रमिला मिश्रा ने अपनी प्राथमिकी में विस्तृत आरोप लगाए थे। उन्होंने बताया कि उनके पति की गंभीर बीमारी का फायदा उठाया गया। कुछ लोगों ने उनकी कमजोर स्थिति का लाभ उठाकर संपत्ति हड़पने की साजिश रची। 07 अप्रैल 2026 को लगभग 70 बिस्वा व्यावसायिक भूमि का बैनामा करवा लिया गया। यह भूमि 50 करोड़ रुपये से अधिक की बताई गई है। यह शिकायत इस पूरे मामले का आधार बनी है।
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