जिसके 16 दिन बाद अपहरण के आरोपी गुफरान के विरुद्ध एससी-एसटी एक्ट सहित अपहरण का मुकदमा पंजीकृत किया गया। बावजूद इसके तत्कालीन थानाध्यक्ष द्वारा विधिक कार्रवाई न करते हुए विधि के अधीन निर्देशों की पालन नहीं किया गया।
मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के हस्तक्षेप पर अपराध शाखा अपराध अनुसंधान उत्तर प्रदेश को जांच का आदेश दिया गया। जिसकी जांच अपर पुलिस अधीक्षक खंडाधिकारी अपराध अनुसंधान विभाग खंड वाराणसी डॉ. कृष्ण गोपाल द्वारा गई तो आरोप सही पाये गए। जिसके बाद तत्कालीन थानाध्यक्ष के विरुद्ध विधिक कार्रवाई हो सकी।