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वाराणसी: किशोरी के अपहरण का केस न दर्ज करने पर तत्कालीन थानाध्यक्ष के खिलाफ मुकदमा, मानवाधिकार आयोग की जांच में पाए गए दोषी 

Sat, 19 Feb 2022 05:23 PM IST
उत्पल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी

सार

मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के हस्तक्षेप पर अपराध शाखा अपराध अनुसंधान उत्तर प्रदेश को जांच का आदेश दिया गया। जिसकी जांच अपर पुलिस अधीक्षक खंडाधिकारी अपराध अनुसंधान विभाग खंड वाराणसी डॉ. कृष्ण गोपाल द्वारा गई तो आरोप सही पाये गए।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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वाराणसी में बड़ागांव परसादपुर गांव में ढाई वर्ष पूर्व अपहृत किशोरी के मामले में तत्कालीन थानाध्यक्ष महेश पांडेय के खिलाफ एसटी-एससी एक्ट सहित अन्य धाराओं में शुक्रवार शाम मुकदमा दर्ज किया गया। थाना प्रभारी द्वारा किशोरी के पिता को प्रताड़ित करने के मामले में मानवाधिकार आयोग द्वारा जांच के उपरांत दोषी पाया गया था।

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जिसपर अपराध अनुसंधान शाखा के निरीक्षक चंद्रिका राम द्वारा शुक्रवार की देर शाम मुकदमा पंजीकृत कराया गया। पुलिस मामले की जांच में जुटी है। थानाक्षेत्र के रायपुर (अनेई) गांव निवासी शिव प्रकाश गौंड की नाबालिग पुत्री इसी परसादपुर गांव निवासी अपने मौसा सुरेश गौंड के घर से 10 जून 2019 को गायब हो गई थी।

घटना के उपरांत काफी खोजबीन के बाद किशोरी के पिता ने 12 जून 2019 को स्थानीय थाने पर मुकदमा पंजीकृत कराना चाहा। लेकिन तत्कालीन थानाध्यक्ष ने मुकदमा दर्ज न कर किशोरी के पिता को मुंबई में मुकदमा लिखाने की बात कहकर वापस भेज दिया। जिसके उपरांत न्याय पाने के लिए किशोरी के पिता ने मानवाधिकार आयोग सहित उच्चाधिकारियों को प्रार्थना पत्र दिया।

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जिसके 16 दिन बाद अपहरण के आरोपी गुफरान के विरुद्ध एससी-एसटी एक्ट सहित अपहरण का मुकदमा पंजीकृत किया गया। बावजूद इसके तत्कालीन थानाध्यक्ष द्वारा विधिक कार्रवाई न करते हुए विधि के अधीन निर्देशों की पालन नहीं किया गया।

मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के हस्तक्षेप पर अपराध शाखा अपराध अनुसंधान उत्तर प्रदेश को जांच का आदेश दिया गया। जिसकी जांच अपर पुलिस अधीक्षक खंडाधिकारी अपराध अनुसंधान विभाग खंड वाराणसी डॉ. कृष्ण गोपाल द्वारा गई तो आरोप सही पाये गए। जिसके बाद तत्कालीन थानाध्यक्ष के विरुद्ध विधिक कार्रवाई हो सकी।
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