कालीन निर्यात संवर्धन परिषद की ओर से संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित 38वें भारत कारपेट एक्सपो को तीन दिनों में दुनिया भर के 315 विदेशी खरीदारों और 248 बायर्स प्रतिनिधियों ने देखा। इस दौरान कालीन की खूबसूरती, उसके अनोखेपन, नई डिजाइन आदि के बारे में विस्तार से समझा और मोलभाव के साथ ही आर्डर दिए।
सोमवार को चार दिवसीय प्रदर्शनी का समापन हो जाएगा। अध्यक्ष डीबीके कमेटी जीके पिल्लई, पूर्व सचिव कपड़ा मंत्रालय एसके पांडा, भदोही के जिलाधिकारी राजेंद्र प्रसाद ने प्रदर्शनी के तीसरे दिन अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। साथ ही उन्होंने भाग लेने वाले कालीन कारोबारियों और विदेशी खरीदारों से मुलाकात की। भारतीय कालीन निर्माताओं द्वारा बनाए गए उत्पादों की सराहना की।
प्रदर्शनी का मुख्य आकर्षण बेकार साडि़यों और कतरनों से बने कालीन थे। वहीं अनानास, जूट, काटन, मक्के के पत्ते, सी ग्रास, केला, गांजा के अपशिष्ट तंतुओं से बने कालीन मोढ़े भी ईको फ्रैंडली होने के कारण ध्यान खींच रहे हैं। यूके, ब्राज़ील, दक्षिण अफ्र ीका और अन्य यूरोपीय देश से आने वाले खरीदार इसे पसंद कर रहे हैं।
अध्यक्ष सीईपीसी सिद्धनाथ सिंह ने बताया कि हस्तनिर्मित कालीन क्षेत्र में युवा और महिला उद्यमियों को बड़े पैमाने पर प्रोत्साहित करने के लिए प्रयास किया जा रहा है। कार्पेट एक्सपो में खादी की चमक भी नजर आ रही है। यहां खादी का स्टाल भी लगाया गया है, जहां खादी की सदरी, कुर्ते, शर्ट के साथ ही लेडीज पहनावों को भी जगह दी गई है।
वहीं खादी ग्रामोद्योग की निर्मित हर्बल टी और कॉफी के साथ ही अन्य उत्पादों का प्रदर्शन किया जा रहा है। सौर ऊर्जा का प्रचार-प्रसार यहां किया जा रहा है। कारोबारी प्रशांत कुमार गुप्ता ने बताया कि भविष्य सौर ऊर्जा का ही है। यहीं कारण है कि कई कारपेट कंपनियों ने पूरा कारखाना ही सोलर आधारित बना लिया है।