किसी भी कंपनी या बैंक के कस्टमर केयर का नंबर यदि गूगल पर ढूंढ रहे हैं तो सावधान हो जाइए। साइबर अपराधियों ने गूगल पर भी अपना जाल बिछा रखा है। इसमें फंसकर लोग अपनी गाढ़ी कमाई गंवा रहे हैं। रेंज के सारनाथ स्थित साइबर क्राइम थाने में ऐसे तमाम मामले दर्ज हुए हैं।
प्रभारी निरीक्षक विजय नारायण मिश्र के अनुसार अब डेबिट व क्रेडिट कार्ड का पासवर्ड या ओटीपी पूछकर बहुत कम ठगी की जा रही है। साइबर अपराधी अब गूगल पर ज्यादा सक्रिय रहते हैं। मोबाइल, बैंक सहित अन्य नामी कंपनियों के नाम से फर्जी वेबसाइट बनाते हैं। फर्जी कस्टमर केयर नंबर उपलब्ध कराते हैं। -
एक करोड़ चट कर गए साइबर अपराधीवाराणसी, जौनपुर, चंदौली और गाजीपुर में साइबर अपराध के मुकदमे दर्ज किए जाते हैं। पांच लाख तक या उससे अधिक की ठगी में मामला दर्ज करके रिकवरी की जाती है। पिछले छह महीने में एक करोड़ 23 लाख 82 हजार 382 रुपये का साइबर अपराध हुआ है। इसमें 18 लाख 40 हजार 919 रुपये पीड़ितों से संबंधित बैकों में होल्ड कराए गए। चार लाख 32 हजार 590 रुपये की रिकवरी कराई गई है। हालांकि, साइबर अपराधी एक करोड़ से ज्यादा चट कर गए।
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धोखाधड़ी होने पर 24 घंटे के अंदर करें शिकायत
प्रभारी निरीक्षक के मुताबिक साइबर अपराध होने पर तुरंत 1930 नंबर पर कॉल करें। 24 घंटे के अंदर सूचना देने पर रकम बैंक खाते में होल्ड हो जाएगी।
ये करें
- सतर्कता ही आपका हथियार। लालच में न पड़ें।
- किसी पर आंख मूंदकर विश्वास करने की प्रवृत्ति से बजा आएं।
- किसी अनजान के कहने पर कोई भी लिंक या कोई एप मोबाइल में डाउनलोड न करें।
- गूगल से कस्टमर केयर का नंबर न खोजें।
- हमेशा अधिकारिक वेबसाइट या कंपनी के स्थानीय कार्यालय पर पहुंचकर जानकारी हासिल करें।
केस-एक
चंदौली के किदवई नगर निवासी मनोज कुमार झा ने गूगल से कस्टमर केयर से बैंक का नंबर लिया और फोन कर दिया। दूसरी तरफ से सीएस नामक एप डाउनलोड करने का सुझाव दिया गया। इसे डाउनलोड करते ही मनोज के दो बैंक खाते से पांच बार में 11 लाख 30 हजार रुपये निकल लिए गए।
केस-दो
जौनपुर के बदलापुर, घनश्यामपुर निवासी विनोद यादव ने एप डाउनलोड किया। कुछ देर में ही मोबाइल का हैक हो गया। दो बैंकों व क्रेडिट कार्ड से पांच लाख 20 हजार रुपये निकाल लिए गए।