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राजकीय होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज: विवादित जमीन पर निर्माण, 3.58 करोड़ रुपये बर्बाद; कैग रिपोर्ट में खुलासा

Tue, 22 Sep 2026 11:20 AM IST
Pragati Chand अभिषेक सेठ, संवाद न्यूज एजेंसी, वाराणसी।

सार

वाराणसी में राजकीय होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज का निर्माण विवादित जमीन पर शुरू करा दिया गया। इसका खुलासा भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (कैग) की 2026 की ऑडिट रिपोर्ट से हुआ है। 
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कैग रिपोर्ट। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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राजकीय होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज का निर्माण विवादित जमीन पर शुरू करा दिया गया। इसपर 3.58 करोड़ रुपये का खर्च भी हो गए। जुलाई 2022 से ही मेडिकल कॉलेज का निर्माण ठप है। इसका खुलासा भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (कैग) की 2026 की ऑडिट रिपोर्ट से हुआ है। कैग ने निर्माण की पूरी प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। दूसरी तरफ 50-बेड वाले आयुष अस्पताल में बिना आवश्यकता और डिमांड के ही 12.53 लाख रुपये के 17 उपकरण खरीद लिए गए। ये उपकरण सीलबंद बक्सों में बेकार पड़े हैं।

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कैग रिपोर्ट के मुताबिक, राष्ट्रीय आयुष मिशन (एनएएम) के तहत वर्ष 2021-22 में वाराणसी में 40.24 करोड़ रुपये की लागत से राजकीय होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज, अस्पताल और छात्रावास के निर्माण की स्वीकृति मिली थी। इसके लिए जिला प्रशासन को पांच एकड़ भूमि उपलब्ध करानी थी। 

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इसी बीच उत्तर प्रदेश बजट मैनुअल के नियमों की अनदेखी कर भूमि के प्राथमिक सर्वेक्षण व विवादों की पड़ताल किए बिना ही कार्यदायी संस्था को 8.77 करोड़ रुपये जारी कर दिए गए। यह मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट पहुंचा और सुनवाई के बाद निर्माण पर रोक लग गई। जब तक रोक लगी तब तक 3.58 करोड़ रुपये खर्च हो चुके थे। 

काम ठप होने से पूरी धनराशि बेकार हो गई। इसी तरह आयुष अस्पताल में बिना वास्तविक मांग के भेजे गए उपकरणों का इस्तेमाल नहीं हो पा रहा। अस्पताल में 53 प्रतिशत तक डॉक्टरों व स्टाफ की कमी है। यूनानी व आयुर्वेदिक दवाओं की आपूर्ति भी शून्य मिली है।  

बिना एनओसी दे दिए दो भूखंड निवेश और रोजगार शर्त भी गायब
करखियांव औद्योगिक क्षेत्र (एग्रो पार्क) में उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीसीडा) की लापरवाही सामने आई है। यूपीसीडा ने बिना एनओसी के ही दो बड़े भूखंड उद्यमियों को उद्योग लगाने के लिए दे दिए। कैग की निष्पादन लेखा परीक्षा रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है। 

सामने आया है कि कैग की यूपीसीडा की लापरवाही ऑडिट के दौरान इन भूखंडों की रिपोर्ट समिति को उपलब्ध ही नहीं कराई गई। इसके अलावा यूपीसीडा की ओर से एग्रो पार्क में बुनियादी सुविधाओं का भी बड़े भूखंडों के आवंटन अभिलेख कैग से छिपाए गए, रिपोर्ट से खुली पोल विकास नहीं हुआ। 

कैग रिपोर्ट के अनुसार, करखियांव औद्योगिक क्षेत्र के दो भूखंडों एच 1 ए/1 (क्षेत्रफल 37,372 वर्गमीटर) और एच 1 ए/2 (क्षेत्रफल 17,116 वर्गमीटर) के आवंटन से संबंधित परियोजना मूल्यांकन समिति की सिफारिशों और अभिलेख ही यूपीसीडा की ओर से लेखा परीक्षा को नहीं दिए गए। नियमों के तहत समिति की ओर से अंकन प्रणाली और मेरिट के आधार पर ऑडिट किया जाना अनिवार्य था, लेकिन दोनों भूखंडों की फाइलें दबा ली गईं। रिपोर्ट में कहा गया है कि लेखा परीक्षा दल को रिकॉर्ड न देना सीधे तौर पर गड़बड़ियों पर पर्दा डालने और मनमाने आवंटन जैसा है। जो कि सरकारी नियमों के विपरीत है।  

रिपोर्ट में ये खुलासा
रिपोर्ट में सामने आया कि करखियांव में औद्योगिक भूखंड संख्या सी-12ए (क्षेत्रफल 14,989.29 वर्गमीटर) का आवंटन 21 दिसंबर 2021 को किया गया था। आवंटी ने अपनी डीपीआर में 9.90 करोड़ रुपये (990 लाख रुपये) के पूंजी निवेश और 105 लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार देने की लिखित बात कही थी। यूपीसीडा मुख्यालय के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद अधिकारियों ने आवंटन पत्र में अनिवार्य निवेश और रोजगार देने की शर्त को शामिल ही नहीं किया। आवंटन के बाद उद्यमी ने जमीन पर उद्योग लगाया या नहीं और रोजगार सृजित हुआ या नहीं, इसकी निगरानी भी नहीं की गई।
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अस्पतालों में बुनियादी सुविधाओं और दवाओं का संकट
राज्य औषधि परीक्षण प्रयोगशाला (डीटीएल) प्रति सप्ताह औसतन मात्र एक सैंपल की जांच कर रही थी। दूसरी ओर, अस्पतालों व औषधालयों में ओपीडी पंजीकरण, एक्स-रे, पैथोलॉजी, बायो-मेडिकल वेस्ट निस्तारण और अग्निशमन सुरक्षा मानकों का घोर अभाव पाया गया। कैग ने सरकार को योजनाबद्ध वित्तीय प्रबंधन, रिक्त पदों को तुरंत भरने और निर्माण कार्यों की समयबद्ध निगरानी सुनिश्चित करने की सख्त सिफारिश की है।

शासन की ओर से होम्योपैथ अस्पतालों में सुविधाएं बढ़ाई जा रही हैं। मैंने हाल ही में जिम्मेदारी संभाली है। कैग की ऑडिट रिपोर्ट की जानकारी नहीं हो सकी है। होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज के निर्माण और इसके बजट के मुद्दे पर विस्तृत जानकारी लेकर शासन को अवगत कराया जाएगा। -डॉ. प्रतिमा सिन्हा, जिला होम्योपैथ अधिकारी

कैग रिपोर्ट के आधार पर भूखंडों की फिर से जांच कराई जाएगी। जांच के बाद जो भी रिपोर्ट आएगी, इसे सार्वजनिक किया जाएगा। -एसएम पटेल, क्षेत्रीय प्रबंधक, यूपीसीडा

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