गणेश प्रतिमाओं के विसर्जन को लेकर असमंजस की स्थिति बन गई है। गंगा में मूर्ति विसर्जन को लेकर पूजा समितियों को जहां फैसला आने का इंतजार है, वहीं प्रशासन उच्च न्यायालय के आदेश का अनुपालन कराने पर अडिग है। जिलाधिकारी विजय किरण आनंद ने कहा है कि कुंडों में ही विसर्जन कराया जाएगा। दूसरी ओर कई पूजा समितियों ने गणेश प्रतिमाओं के विसर्जन से इनकार कर दिया है। उनका कहना है कि प्रतिमा विसर्जन कोर्ट का फैसला आने पर परंपरा के अनुसार गंगा में ही किया जाएगा। वरना वह प्रतिमाओं को घरों या उत्सव स्थलों पर ही रखे रहेंगे। बीते वर्ष की कई प्रतिमाएं अभी विसर्जन के लिए संजो कर रखी गई हैं।
दुर्गा घाट स्थित नाना फड़नवीस के बाड़े में स्थापित नूतन बालक गणेशोत्सव की प्रतिमा का विसर्जन नहीं होगा। सात दिवसीय उत्सव के समापन के बाद रविवार दोपहर गाजे-बाजे के साथ शोभायात्रा निकाली जाएगी लेकिन प्रतिमा को पुन: उसी स्थल पर लाकर रख दिया जाएगा। समिति के संयोजक डॉ. माधव जनार्दन रटाटे ने बताया कि पिछले वर्ष जब गंगा में विसर्जन करने पर रोक लगी दी गई, तब भी इस समिति की प्रतिमा को विसर्जित नहीं किया गया था। उसी प्रतिमा को रंग-रोगन के बाद इस बार भी स्थापित किया गया है। इस गणेशोत्सव की स्थापना बाल गंगाधर तिलक ने की थी।
इसी तरह दुर्गा घाट स्थित मंगल भवन में प्रतिष्ठापित श्री काशी गणेशोत्सव कमेटी की गणेश प्रतिमा का भी विसर्जन नहीं किया जाएगा। इस समिति के मंत्री कुशाग्र मंडलीकर ने बताया कि पिछले वर्ष की भी प्रतिमा अभी विसर्जन के लिए मंगल भवन परिसर में ही रखी गई है। सांगवेद विद्यालय में प्रतिष्ठापित बीते वर्ष की गणेश प्रतिमा को भी अब तक विसर्जित नहीं किया गया है। अगस्त्यकुंडा के शारदा भवन में प्रतिष्ठापित गणेश प्रतिमा का भी कुंडों-तालाबों में विसर्जन नहीं किया जाएगा। इस गणेशोत्सव के संयोजक विनोद राव पाठक ने बताया कि शारदा भवन की छत पर कृतिम गंगा बनाकर उसी में प्रतिमा विसर्जन की रस्म निभाई जाएगी। इसके अलावा लोकमान्य श्री सार्वजनिक गणेशोत्सव समिति की ओर से पांच स्थानों पर गणेशोत्सव किया जा रहा है। समिति के समन्वयक उपेंद्र विनायक सहस्त्रबुद्धे ने बताया कि जहां उत्सव वहीं विसर्जन का फैसला किया गया है। कुंडों में प्रतिमाओं का विसर्जन नहीं होगा। इस समिति ने पिछले वर्ष भी कुंडों में विसर्जन नहीं किया था।