हत्या के बाद गांव का माहौल पूरी तरह बदल गया है। खासकर राजभर बस्ती में सन्नाटा पसरा हुआ है। पुलिस कार्रवाई के डर से अधिकांश लोग अपने घरों में ताला लगाकर फरार हो गए हैं। गांव में केवल कुछ बुजुर्ग महिलाएं ही बची हैं, जो पशुओं की देखभाल कर रही हैं।
मृतक के चाचा अरुण सिंह ने बताया कि मनीष सिंह गांव के विकास में सक्रिय थे। उन्होंने करीब 70 परिवारों को दोना-पत्तल बनाने की मशीनें लगवाकर स्वरोजगार से जोड़ा था। उनके कारखाने में 17-18 लोग काम करते थे, जिनमें सात दिव्यांग भी शामिल हैं। उनकी हत्या से गांव में शोक और आक्रोश दोनों का माहौल है।
इधर, मनीष सिंह के परिजनों से मिलने जा रहे समाजवादी पार्टी के प्रतिनिधिमंडल को बृहस्पतिवार को पुलिस ने रास्ते में रोक दिया। जिलाध्यक्ष सुजीत यादव ‘लक्कड़’ के नेतृत्व में जा रहे कार्यकर्ताओं ने विरोध स्वरूप धरना दिया। काफी देर बाद पुलिस ने कुछ सदस्यों को पैदल जाने की अनुमति दी। प्रतिनिधिमंडल ने पीड़ित परिवार से मिलकर सांत्वना दी और हर संभव मदद का आश्वासन दिया।