कमिश्नरी परिसर में आत्मदाह करने वाले सराफा कारोबारी मनीष अग्रवाल की इलाज के दौरान हुई मौत के मामले में मुख्यमंत्री राहत कोष से पांच लाख रुपये की धनराशि दी जाएगी। इसके लिए जिला प्रशासन ने गुरुवार को कागजी कार्रवाई पूरी कर ली। उधर, भाजपा प्रतिनिधि मंडल ने गुरुवार को कमिश्नर से मुलाकात कर वीडीए की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए।
कमिश्नर नितिन रमेश गोकर्ण से आपत्ति दर्ज कराने पहुंचे चंदौली सांसद महेंद्र नाथ पांडेय ने कहा कि वीडीए के अधिकारी कोर्ट के आदेश की गलत व्याख्या कर रहे हैं। वीडीए के अधिकारियों के ऊपर कोर्ट के आदेश की अवमानना के आरोप में मानहानि का मुकदमा दर्ज कराने के साथ ही पीड़ित परिवार को 50 लाख रुपये देने की मांग की। कमिश्नर ने आश्वासन दिया कि जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। आपत्ति दर्ज कराने वालों में सांसद वीरेंद्र सिंह मस्त, विधायक डा. ज्योत्सना श्रीवास्तव व रवींद्र जायसवाल, एमएलसी केदारनाथ सिंह रहे। उधर, मजिस्ट्रेटी जांच कर रहे एडीएम सिटी विंध्यवासिनी राय ने बताया कि वीडीए के एक अवर और एक सहायक अभियंता का बयान दर्ज किया गया है। इसके पूर्व वीडीए के तहसीलदार डीके सिंह का बयान दर्ज किया गया था। मनीष के परिवार वालों ने अब तक बयान दर्ज नहीं कराया है।