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काशी में बंपर वोटिंग ने भाजपा को किया बम-बम 

Sun, 12 Mar 2017 01:33 PM IST
अजीत कुमार सिंह, अमर उजाला, वाराणसी
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lahar - फोटो : अमर उजाला
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काशी में भाजपा के ‘क्लीन स्वीप’ की जमीन तैयार की बंपर वोटिंग ने। ऐसा आंकड़े कह रहे हैं। विधानसभा चुनाव के इतिहास में पहली बार यहां 61 फीसदी से अधिक मतदान हुआ। जबकि इससे पहले तक सर्वाधिक मतदान प्रतिशत 2012 के विधानसभा चुनाव में 57.35 था।
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इस बार मतदान में चार फीसदी की बढ़ोतरी का सीधा फायदा भाजपा को हुआ। पिछले विधानसभा चुनाव में जितना मत पाकर विपक्षी प्रत्याशियों ने जीत हासिल की थी, अबकी लगभग उतना ही मत पाने के बावजूद उन्हें दोगुने अंतर से पराजय का सामना करना पड़ा है। 


पिंडरा से अजय राय ने 2012 में 52863 वोट पाकर 9218 वोट से जीत हासिल की थी। इस बार उन्हें 48189 वोट मिले यानी पिछले चुनाव के मुकाबले केवल 4664 वोट कम मिले लेकिन उन्हें भाजपा के अवधेश सिंह से 42425 वोटों से शिकस्त खानी पड़ी।
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सेवापुरी से पिछले चुनाव में सपा से सुरेंद्र सिंह पटेल 56849 वोट पाकर 19907 चुनाव जीत गए थे। इस बार उन्हें 54241 वोट मिले हैं यानी लगभग दो हजार वोट कम लेकिन भाजपा-अपना दल एस के नीलरतन पटेल नीलू से अबकी उन्हें 49182 वोटों से हार का सामना करना पड़ा है।

अजगरा में बसपा के टी राम 2012 के विधानसभा चुनाव में 60239 मत पाकर विजयी हुए थे। इस बार 52480 वोट पाने के बावजूद वह दूसरा स्थान भी हासिल नहीं कर पाए।

इसी तरह, 2014 में हुए रोहनिया उपचुनाव में 76121 वोट पाकर विजयी हुए सपा के महेंद्र पटेल अबकी 62332 वोट पाने के बावजूद भाजपा प्रत्याशी सुरेंद्र नारायण से 49182 वोटों से चुनाव हार गए हैं।

 
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127 में 84 प्रत्याशी एक हजार का आंकड़ा भी नहीं छू सके

lahar - फोटो : अमर उजाला
जिस शिवपुर विधानसभा से पिछली बार बसपा के टिकट पर उदय लाल मौर्या 48716 वोट पाकर जीते थे वहीं से इस बार 56194 वोट पाकर सपा के आनंद मोहन यादव दूसरे स्थान पर रहे। ऐसे ही दक्षिणी से भाजपा के श्यामदेव राय चौधरी पिछले चुनाव में 57868 वोट पाकर जीते थे।

यहीं से इस बार 75 हजार से अधिक वोट पाकर कांग्रेस के राजेश मिश्र को दूसरे स्थान से संतोष करना पड़ा जबकि जीत हासिल करने वाले भाजपा के डा. नीलकंठ तिवारी 92 हजार से अधिक वोट हासिल हुए।

सियासत के जानकार बढ़े मतदान प्रतिशत का श्रेय भी पीएम मोदी के तीन दिनी चुनावी रोड शो को दे रहे हैं। वहीं, अधिकाधिक मतदान के लिए घर-घर जाकर मतदाताओं को प्रेरित करने की भाजपा की बूथ स्तर पर बनी रणनीति ने भी असर दिखाया। 

दिलचस्प यह भी रहा कि अधिकतर मतदाताओं ने राष्ट्रीय और राज्यीय दलों के प्रत्याशियों के प्रति ही रुचि दिखाई। आठों सीटों के कुल 127 उम्मीदवारों में से 85 उम्मीदवार एक हजार के आंकड़े को भी नहीं छू सके।

ये उम्मीदवार या तो निर्दल मैदान में उतरे थे या फिर उन्हें छोटी पार्टियों का समर्थन था। इनमें शिवपुर में 10, रोहनिया में 4, अजगरा में 4, उत्तरी में 12, सेवापुरी में 8, कैंट में 20, रोहनिया में 4, दक्षिणी में 14 और पिंडरा में 6 प्रत्याशी ऐसे रहे, जिन्हें एक हजार से कम वोट प्राप्त हुए हैं। 
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