वाराणसी। काशी के विख्यात जलोत्सव ‘बुढ़वा मंगल’ को अब अस्सी घाट पर शिफ्ट करने की तैयारी है। वर्षों बाद सिल्ट की सफाई होने की वजह से आकर्षण का केंद्र बने इस घाट पर बुढ़वा मंगल की महफिल सजाने का प्रस्ताव संस्कृति विभाग ने तैयार किया है।
11 मार्च को मंडलायुक्त आरएम श्रीवास्तव की मौजूदगी में होने वाली बैठक में इस प्रस्ताव पर मुहर लगने के संकेत मिले हैं। ‘बुढ़वा मंगल’ 17 मार्च को मनाया जाएगा।
होली के बाद पड़ने वाले पहले मंगलवार को इस बार बुढ़वा मंगल नहीं मनाया जा सकेगा। इसकी वजह है प्रशासनिक अमले की तैयारी समय से न हो पाना। सुबह-ए-बनारस की महफिल के 111 दिन पूरे होने पर जश्न मनाने की योजना के चलते भी बुढ़वा मंगल के लिए अफसर समय नहीं निकाल सके।
इस वजह से यह महफिल अब दूसरे मंगलवार यानी 17 मार्च को सजाई जाएगी। तैयारी बैठक 11 मार्च को कमिश्नर की मौजूदगी में होगी। क्षेत्रीय सांस्कृतिक केंद्र प्रमुख डॉ. रत्नेश वर्मा ने बताया कि इस बार अस्सी घाट पर बुढ़वा मंगल का आयोजन कराने के लिए सुझाव दिए जा रहे हैं।
अस्सी घाट पर कार पार्किगिं की बेहतर सुविधा तो मिलेगी ही, जगह भी वहां अधिक है। इस वजह से बुढ़वा मंगल अस्सी पर मनाने का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। अभी कलाकारों की सूची को मूर्त रूप नहीं दिया गया है। संस्कृति विभाग ने तीन कलाकारों को इस संगीतोत्सव में आमंत्रित करने का फैसला किया है लेकिन अभी नाम सार्वजनिक नहीं किए गए हैं।