प्रशांत अग्रवाल ने कहा कि ऑनलाइन बाजार को बढ़ावा देकर सरकार आर्थिक गुलामी की शुरूआत कर रही है। मुफ्त वाली सभी योजनाओं को बंद करना चाहिए। विजय गुप्ता ने औद्योगिक क्षेत्र में लगी इकाइयों में सेवा प्रदाता को शामिल करने की बात कही। अजय जायसवाल ने कहा कि एमएसएमई कंपनियां या उद्यमी जो कर जमा कर रहे हैं, उसका 20 फीसदी उन्हें वापस मिलना चाहिए। इससे उनकी पूंजी बढ़ेगी और उद्योग आगे बढ़ेगा।
उद्यमी अजय राय ने कहा कि आयकर स्लैब का दायरा बढ़ना चाहिए। जो दायरा अभी पांच लाख तक का है, उसे बढ़ाकर 10 लाख तक किया जाना चाहिए। एमएसएमई के लिए जीएसटी की दर अलग होनी चाहिए। सत्यवीर साहू ने कहा कि देश में स्पेशल इकोनामिक जोन बने हैं, लेकिन रोजगार घटता जा रहा है। अब जरूरत उत्पादन इकाइयों को आगे बढ़ाने की है।
अनूप साहू ने कहा कि जीएसटी और आयकर का दायरा बढ़ना चाहिए। आम आदमी के उपयोग की वस्तुएं भी सस्ती होनी चाहिए। परेश सिंह ने कहा कि ऑनलाइन कंपनियों का कारोबार बंद किया जाना चाहिए। इनकी वजह से छोटे व्यापारियों और उद्यमियों को नुकसान हो रहा है।
अमित गुप्ता ने कहा कि मैन्यूफैक्चरिंग इकाइयों पर सबसे ज्यादा टैक्स का भार है। सरकार को ब्याज दरों में कटौती करनी चाहिए। इससे उद्यमियों को राहत मिलेगी। पंकज बिजलानी ने कहा कि बेकरी उत्पादों के उत्पादन में टैक्स इतना अधिक है कि कंपनी बंद करनी पड़ी है। मूल टैक्स 18 फीसदी है, जबकि कंपोजीशन पर टैक्स दो फीसदी रखा गया।
आशीष गुप्ता ने कहा कि सरकार भंडारण पर नियंत्रण करे। बड़ी कंपनियां बाजार से माल उठाकर उसे डंप कर देती हैं, फिर उसे मार्केट से कम दर पर बेचती हैं। सतीश गुप्ता ने कहा कि यदि सरकार को लगता है कि टैक्स कम मिल रहा है तो टैक्स लेने की बजाय बैंक से इक्विटी दिलाए। इसमें उद्यमियों को थोड़ा जोखिम उठाना होगा, लेकिन उनके उद्योग में बढ़ोतरी होगी। उद्यमियों की पूंजी बढ़ेगी। सुनील अग्रहरी ने कहा कि दस करोड़ तक के उद्योगों को टैक्स से छूट मिलनी चाहिए। जुर्माने का प्रावधान भी खत्म होना चाहिए।
सिद्धार्थ सिंह ने कहा कि उद्यमी और सरकार के बीच कम्युनिकेशन गैप नहीं होना चाहिए। उद्यमियों की जो भी जरूरतें हैं, उसका ख्याल आम बजट में रखा जाना चाहिए। राकेश जायसवाल ने जीएसटी और आयकर के स्लैब में रियायत देने की मांग रखी। ज्योति शंकर मिश्रा ने कहा कि महंगाई से निजात के ठोस प्रयास किए जाने चाहिए। आम बजट से उद्यमी व कारोबारियों को बड़ी उम्मीदें हैं।