हाथी पर बुद्ध के अस्थि कलश रखकर निकली शोभा यात्रा।
मूलगंध कुटी विहार के 85वें वार्षिकोत्सव समारोह के दौरान सोमवार को सारनाथ के बुद्ध मंदिर प्रांगण से भगवान बुद्ध के पवित्र अस्थि अवशेष को निकाला गया। वियतनामी दल के प्रमुख डेमबेन यांग ने हाथी पर पवित्र अस्थि अवशेष को रखकर भ्रमण कराया। उसके पीछे चार अन्य हाथियों पर वियतनामी दल सवार हुआ और मंदिर प्रंागण से भव्य शोभायात्रा निकली।
शोभायात्रा में एक वाहन पर भगवान बुद्ध की लगभग साढ़े चार फीट सुनहरी रंग की धम्म चक्र प्रवर्तन की मुद्रा में प्रतिमा रखी गई थी। जिसके पीछे आधा दर्जन बग्घियों पर वियतनामी दल पुष्पवर्षा करते हुए चल रहे थे। सबसे आगे बुद्ध प्रतिमा, हाथी पर अवशेष, फिर बग्घी पर सवार लोग फूल बरसा रहे थे। तिब्बती बौद्ध भिक्षु अपने पारंपरिक परिधानों में अपने वाद्य यंत्रों को बजा रहे थे और बुद्धं शरणं गच्छामी, धम्मं शरणं गच्छामी का पाठ करते हुए चल रहे थे।
उसके पीछे श्रीलंका, भूटान, थाईलैंड के बौद्ध अनुयायी पंचशील झंडों के साथ चल रहे थे। शोभायात्रा सारनाथ चौराहे से होते हुए तिब्बती बौद्ध मंदिर मार्ग होेते हुए, रंगोली, हवेलिया तिराहे से गंज, संग्रहालय से मूल गंध कुटी विाहर पहुंची और समाप्त हो गई। वहां मंदिर प्रांगण की परिक्रमा कर उनके अवशेष को सुरक्षित रख दिया गया।