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बेमेल शादी टूटी, नेताओं का मूर्खतापूर्ण स्वागत

Sat, 02 Apr 2016 02:07 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
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राजेंद्र प्रसाद घाट पर महामूर्ख मेले में दूल्हा-दुल्हन बने लोगों की हुई शादी।
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लार्ड शिवा, मोहतरमा अन्नपूर्णा एंड काशी के कोतवाल मिस्टर काल भैरव के अनलिमिटेड रहमोकरम से नायाब अकेजन महामूर्ख मेले में शुक्रवार की रात हंसते-हंसते लोगों ने पेट थाम लिया। ठेलागाड़ी की तरह मंच पर कवियों से ज्यादा लदे कविता प्रेमी मूर्खतापूर्ण शृंगार वाली वस्तुओं से नवाजे जाने के लिए साहित्यिक मेले की शोभा बने। हास्य रस को दुहने-गारने का नायाब नमूना सांस्कृतिक नगरी काशी ने इस कदर पेश किया कि पूछिए मच। घाट पर कटोरा लेकर भीख मांगने वाले दिव्यांग पुरुष को कन्या और महिला को वर बना कर मंडप   में ढोल-नगाड़े के शोर के साथ लाया गया।
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मूर्ख पुरोहितों ने उल्टे मंत्रोच्चार से मोमबत्ती की रोशनी मेें ऐसी शादी कराई कि जयमाल के वक्त ही रिश्ता टूट गया। नगाड़े की ताल पर गधे की आवाज में गायन होने लगा और लोक मानस में प्रसिद्ध धोबिया नाच की थिरकन पर ठहाके गूंजने लगे। शनिवार गोष्ठी की ओर से राजेंद्र प्रसाद घाट पर हंसी के हंगामा खड़ा कर देने वाले मूर्ख दिवस के आयोजन का नमूना ऐसा ही था। सांझ ढलने के बाद ही राजेंद्र प्रसाद घाट की सीढ़ियां किसी छविगृह की बालकनी में तब्दील हो गईं। मूर्खता के इस मेले में पूर्वांचल भर से भीड़ इस कदर उमड़ी कि घाट पर तिल रखने की भी जगह नहीं बची।

कवि राम गोपाल सराफ ने लाल छींटदार साड़ी, ब्लाउज और कमर तक लटकने वाली चोटियां पहन कर नाउन की भूमिका का निर्वाह किया। पहले जहां नेता, डाक्टर, शिक्षाविद दंपती को इस मेले में दूल्हा-दुल्हन का बेमेल जोड़ा बनाकर मूर्खता पेश की जाती थी, वहीं इस बार पीएम नरेंद्र मोदी के दिव्यांग प्रेम को देखते हुए घाट की सीढ़ियों से ही दो जोड़े दिव्यांगों को लाकर वर-वधू के रूप में शादी रचाई गई। नाउन ने पिसान से चौक पूरे और मंत्र न जानने वाले पुरोहित अनाप-शनाप मंत्रों से शादी कराने लगे।
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इसके बाद तो हास्य की फुहारें पड़ने लगीं। संयोजन करने वाले कवि सांड़ बनारसी का कहना था कि राजनीति की कोख से जब सांप्रदायिकता, जाति और वर्गवाद जैसा जहर फैल रहा हो। नागरिक असहाय हो। व्यक्ति के जीवन से हास्य, मनोरंजन दुम दबाकर भाग रहा हो, ऐसे घुटन भरे माहौल में मधुमास के बीच महामूर्ख मेला हास्य की औषधि लेकर आता है, ताकि लोगों को जीने, फिक्रों को भुलाकर आगे बढ़ने  की ताकत मिल सके। आयोजन के मुख्य अतिथि शिक्षाविद दीपक मधोक रहे। संचालन पं. धर्मशील   चतुर्वेदी ने किया।
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