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Varanasi News: हर अजाखाने में टूटी हुई चूड़ियां अच्छी लगीं...

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जब उतारी मन्नतें, रुसवाइयां अच्छी लगीं, पांव में डाली गईं जब बेड़ियां अच्छी लगीं... ये मोहब्बत और अकीदत का अजब अंदाज है, हर अजाखाने में टूटी हुईं चूडि़यां अच्छी लगीं...। मुर्हरम के चांद की तस्दीक के साथ कुछ ऐसा ही नजारा शहर के हर शिया समुदाय के अजाखाने में नजर आया। रविवार को मुहर्रम का चांद देखकर अकीदतमंदों की आंखें छलक पड़ीं।
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रविवार को 1445 हिजरी के 30 जिलहिल को जैसे ही मुहर्रम का चांद नजर आया तो शिया हजरात की आंखें नम हो गईं। उन्होंने शहीदे कर्बला और उनकी शहादत को याद किया। इसके साथ ही शहर भर में मुहर्रम के इस्तकबाल में मजलिसों का सिलसिला शुरू हो गया। अहले सुन्नत भाइयों ने इमाम चौक पर शमां रोशन करके हरे और लाल झंडे लगाकर शहीदों को खिराजे अकीदत पेश की। पानी और शरबत पर उनके नाम से फातिहा कराई गई और उनके नाम पर लोगों में तकसीम किया गया। हर तरफ या हुसैन... या हुसैन... की सदाएं गूंजने लगीं।
शिया जामा मस्जिद के प्रवक्ता हाजी फरमान हैदर ने बताया कि सन 1445 हिजरी खत्म हो गया और सन 1446 हिजरी शुरू हो रहा है। कहा कि मेरी खुशियों का सफर गम से शुरू होता है, मेरा हर साल मुहर्रम से शुरू होता है। सोमवार को शहर भर में सैकड़ों मजलिसें सुबह से देर तक होंगी। लोग दरगाह और इमामबाड़ों पर पहुंचकर इमाम हुसैन को खिराजे अकीदत पेश करेंगे। रामनगर, गौरीगंज, भेलूपुर, मदनपुरा, चौक, दालमंडी, रसूलपुर, बड़ी बाजार, कच्चीबाग, राजपुरा, पठानी टोला, मुकीमगंज, प्रह्लादघाट आदि क्षेत्रों में मजलिसें होंगी। शहर की 28 अंजुमन अपने-अपने क्षेत्र में नौहा व मातम करेंगे। पहली मुहर्रम को अलम और दुलदुल का जुलूस सदर इमामबाड़े परिसर में उठाया जाएगा। इसमें शहर भर की अंजुमनें शामिल होंगी।
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