खेती-किसानी के साथ ही इस विधानसभा क्षेत्र की मिट्टी राजनीतिक रूप से भी उर्वर रही है। पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को 1977 के लोकसभा चुनाव में इसी क्षेत्र के मोतीकोट गांव निवासी राजनारायण ने शिकस्त दी थी। वहीं, कुंडरिया में जन्में पूर्व मंत्री राज बिहारी सिंह और घोसिला गांव निवासी पूर्व मंत्री निहाला सिंह के कारण भी यह क्षेत्र अपनी विशिष्ट पहचान रखता है। मिर्जापुर और भदोही जिले की सीमा से सटे इस क्षेत्र में पटेल, ब्राह्मण, दलित और भूमिहार मतदाताओं की बहुलता है। 2012 में गंगापुर विधानसभा और भदोही की औराई विधानसभा के आंशिक हिस्से को मिलाकर नई विधानसभा सीट सेवापुरी का गठन किया गया।
‘नहीं है राजा भोज जो देख सके रुलाई, किस में है हिम्मत जो देखे जन-जन के दर्द की सच्चाई...।’ सिरहिरा बाजार सेवापुरी में लालचंद की चाय की दूकान पर जारी सियासी चर्चा के बीच यह कहना था सेवानिवृत्त शिक्षक और कवि आजाद गुरु का। आजाद कहते हैं सड़कों का जाल बिछा दिया हमारे मंत्री ने लेकिन उनमें क्या इस्तेमाल हो रहा है, यह नहीं देखा। इलाके में नहर और माइनर की कमी नहीं है लेकिन जरूरत के समय धूल उड़ती रहती है जबकि वह पीडब्ल्यूडी के साथ सिंचाई विभाग के भी राज्यमंत्री भी रहे।
मिर्जामुराद क्षेत्र के प्रतापपुर की हीरावती देवी कहती हैं कि कुछ ऐसा काम हुआ होता जिससे उनके तीन में किसी एक बेटे को भी रोजगार मिल जाता। डंगहरिया के बीज भंडार मालिक राज बहादुर पटेल का कहना है कि ज्ञानपुर प्रखंड की माइनरों में जरूरत के समय पानी नहीं आता। राज्यमंत्री सुरेंद्र पटेल के गांव बीरभानपुर की बीडीसी कुसुम के पति चंद्रशेखर कहते हैं शौचालय, राशन कार्ड, सड़क, जल निकासी जैसी समस्याओं से हम जूझ रहे हैं।
भेड़हा गांव के अजय प्रकाश चौधरी ने कहा कि हमारे यहां की सड़क खस्ताहाल है। राजातालाब के राजकुमार गुप्ता, दीपापुर के हरिओम दूबे और भीमचंडी के राजेश कहते हैं कि लग रहा है कि राजातालाब से जक्खिनी जाने वाली सड़क की मरम्मत के लिए अभी और इंतजार करना पड़ेगा। सोनबरसा के प्रधान बाल्मीकि पटेल, सुधीर सिंह और पवन कुमार मिश्रा ने कहा कि सोनबरसा से खरगूपुर व अमरीपुर से परसीपुर मार्ग की मरम्मत कराने के लिए मंत्री से कई बार गुहार लगाई परंतु उन्होंने वादा करते-करते पांच साल गुजार दिए।