अब यह गांव ठीक गंगा के मुहाने पर खड़ा है, जहां लोगों को अपना कोई भी विकास का कार्य अच्छा नहीं लगता। उनको एक मात्र विकास के रूप में केवल अपने गांव को गंगा की गोद में जाने से बचाने का उपाय ही सूझता है।
ग्राम प्रधान बबीता ठाकुर पत्नी समाजसेवी सुरेंद्र ठाकुर लगातार दो दिनों से करीब 2000 बालू से भरी बोरियों को ग्रामीणों के साथ मिलकर नौरंगा संपर्क मार्ग पर डाल रहे हैं, ताकि हर हाल में गंगा के कहर से संपर्क मार्ग को बचाया जाए। जिससे गांव में पानी न फैल सके।
पीड़ितों का कहना है कि दिन प्रतिदिन गंगा की लहरें हमारी कृषि योग्य जमीनों को निकलकर हमें भूमिहीन बनाते चली जा रही है। जिसके कारण अब मासूमों के दो जून के रोटी पर भी सवाल खड़े हो गए। आज भी ग्राम प्रधान प्रतिनिधि ग्रामीणों संग नवरंगा संपर्क मार्ग को बचाने में जी जान से जुटे हुए हैं लेकिन सब कुछ जानने के बाद भी जिला प्रशासन से लेकर बाढ़ विभाग तक मौन बना हुआ है।