बताया जा रहा है कि जयमाल के समय दूल्हा लड़खड़ाते हुए मंच पर पहुंचा और बार-बार तुरंत विदाई कराने की जिद करने लगा। दूल्हे की हालत देखकर दुल्हन नेहा ने तुरंत स्थिति को समझ लिया और सबके सामने शादी से इंकार कर दिया। स्नातक पास नेहा ने कहा कि जब आज शादी के दिन ही यह हाल है, तो आगे जीवन कैसे कटेगा।
दुल्हन के फैसले के बाद दोनों पक्षों में तनाव बढ़ गया और मामला म्योरपुर थाने पहुंच गया। मंगलवार को थाने में दोनों परिवारों ग्रामीणों और जिम्मेदार लोगों की मौजूदगी में पंचायत हुई। गांव का मामला होने के कारण एससी-एसटी आयोग के उपाध्यक्ष जीत सिंह खरवार भी पंचायत में मौजूद रहे।
लंबी बातचीत के बाद दोनों पक्षों में दहेज के रूप में दी गई रकम और सामान वापस करने पर सहमति बनी। इसके बाद बिना शादी के ही बारात वापस लौट गई। घटना पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है। ग्रामीणों ने दुल्हन नेहा के साहसिक फैसले की सराहना करते हुए कहा कि उसने अपने भविष्य को देखते हुए सही निर्णय लिया।