दिवाली पर आतिशबाजी के धुएं का गुबार छाने से सांस और एलर्जी संबंधी तकलीफें बढ़ गई हैं। सबसे ज्यादा परेशानी सांस के मरीजों को है। बच्चे और बुजुर्ग भी श्वास नली और गले के संक्रमण की चपेट में हैं। सरकारी, गैर सरकारी अस्पतालों की ओपीडी में पिछले कुछ दिनों में सांस और एलर्जी संबंधी बीमारियों से पीड़ितों की संख्या तीस फीसदी तक बढ़ी है।
चिकित्सकों के मुताबिक सांस और एलर्जी की तकलीफें बढ़ने की वजह मौसम के बदलाव के साथ दिवाली पर हुई आतिशबाजी है। ओपीडी में सांस, एलर्जी के मरीजों की संख्या 30 प्रतिशत तक बढ़ी है। मंडलीय अस्पताल के चेस्ट फीजिशियन डॉ. आरके शर्मा ने बताया कि श्वास नली में संक्रमण, बलगम आना, नाक जाम होना आदि शिकायतें बढ़ी हैं। उधर, गुरुवार को दीनदयाल, मंडलीय अस्पताल में जबरदस्त भीड़ के चलते मरीजों को खासी परेशानी हुई। मंडलीय अस्पताल की नई ओपीडी बिल्डिंग में मरीज डॉक्टर को पहले दिखाने के चक्कर में आपस में भिड़ गए। कर्मचारियों ने समझाकर किसी तरह शांत कराया।
वहीं, शहर में संचालित तीन सौ अस्पतालों और पैथालाजी संचालकों के खिलाफ नगर निगम सख्त हो गया है। अस्पतालों और पैथालाजी सेंटरों से निकलने वाले बायो मेडिकल वेस्ट को बिना निस्तारित किए कूड़ाघराें में फेंकने पर गुरुवार को नगर आयुक्त श्रीहरि प्रताप शाही ने नोटिस जारी किया है। स्पष्ट कहा है कि नियमों की अनदेखी करने पर क्यों न कार्रवाई की जाए।
नगर आयुक्त ने बताया कि अस्पताल और पैथालाजी सेंटर पर जीव चिकित्सा अपशिष्ट प्रबंधन नियमावली 2016 का प्रावधान लागू है। इसके तहत यहां के अपशिष्ट का निस्तारण अलग करना होता है। साथ ही इसे कूड़ाघरों में फेंकने पर मनाही है। कूड़ाघरों में इसके फेंकने से संक्रामक बीमारियां फैल रही हैं। नागरिकों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। अस्पतालों में बायो मेडिकल वेस्ट के निस्तारण की व्यवस्था का प्रावधान है लेकिन इसका पालन नहीं किया जा रहा। नोटिस जारी कर पंद्रह दिन के अंदर शपथ पत्र के माध्यम से जानकारी मांगी है कि उनके यहां संयंत्र लगा या नहीं। यह भी जानकारी मांगी है कि नियमावली के अनुसार कूड़ा प्रबंधन की क्या व्यवस्था है, यदि इसका उल्लंघन किया जा रहा है तो क्याें न पर्यावरण अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाए।