पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी की पहल पर 2003 में शुरू प्रवासी भारतीय दिवस के क्रम में 21 से 23 जनवरी तक होने वाले तीन दिवसीय प्रवासी भारतीय सम्मेलन को अनूठा बनाया जा रहा है। इस बार के 17वें आयोजन के लिए आतिथ्य सत्कार, भव्य सजावट और जनभागीदारी के जरिए प्रवासियों के बीच काशी के नए स्वरूप की जबदरस्त ब्रांडिंग की तैयारी है। आयोजन की सफलता से दुनिया भर में बदलते बनारस की तस्वीर जाएगी और यहां पर्यटकों की संख्या में बढ़ोत्तरी के साथ ही निवेश के भी अवसर बढ़ेंगे।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी से पहले 16 प्रवासी भारतीय दिवस नई दिल्ली या प्रदेश की राजधानियों में हुए हैं। सरकार और वहां के स्थानीय प्रशासन को इसके लिए ज्यादा मशक्कत नहीं करनी पड़ी। मगर, काशी में टेंट सिटी से लेकर आयोजन स्थलों को नए सिरे से तैयार किया गया है।
मेहमानों की सुविधाओं के लिए सभी व्यवस्थाएं की जा रही हैं। सम्मेलन के जरिए काशी की दुनिया भर में ब्रांडिंग के लिए भारतीय मूल के लोगों से काशी से जुड़ाव की हर कोशिश की जा रही है। काशीवासियों से प्रधानमंत्री ने यादगार स्वागत की अपील कर चुके हैं।
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मंडलायुक्त दीपक अग्रवाल ने कहा कि वाराणसी में प्रवासी भारतीय सम्मेलन के सफल आयोजन के बाद सभी विदेशी मेहमान काशी के ब्रांड अंबेसडर की भूमिका निभाएंगे।
अब तक के प्रवासी भारतीय दिवस
2003-2004: नई दिल्ली, 2005: मुंबई, 2006: हैदराबाद, 2007-2008: नई दिल्ली, 2009: चेन्नई, 2010-2011: नई दिल्ली, 2012: जयपुर, 2013: तिरुअनंतपुरम, 2014, नई दिल्ली, 2015: गांधीनगर, 2016: नई दिल्ली, 2017: बेंगलुरू और 2018: सिंगापुर।
बालेश्वर अग्रवाल ने की थी शुरुआत
प्रवासी भारतीय सम्मेलन शुरू करने में अहम भूमिका निभाने वाले बालेश्वर अग्रवाल बीएचयू में इंजीनियरिंग के छात्र थे। ओडिशा के बालासोर निवासी अग्रवाल ने बाद में पत्रकारिता की। उन्होंने 1978 में अंतरराष्ट्रीय सहयोग परिषद की स्थापना की।
परिषद के माध्यम से मॉरीशस, नेपाल, दक्षिण अफ्रीका, भूटान, सूरीनाम, फिजी और म्यांमारआदि भारतवंशी बहुल देशों से संबंध मजबूत किए गए। उनकी सलाह पर ही प्रवासी भारतीयों के लिए अलग मंत्रालय बनाया गया। अब यही मंत्रालय सम्मेलन आयोजित कर रहा है। टेंट सिटी को भी बालेश्वर अग्रवाल नगर नाम दिया गया है।
पुरातन कला और संस्कृति से रूबरू होंगे प्रवासी मेहमान
प्रवासी भारतीयों के लिए सभी धर्मों के ग्रंथों की प्रदर्शनी लगाई जाएगी। यह प्राचीन ग्रंथ धर्म, कला, दर्शन, संस्कृति और साहित्य से संबंधित होने के साथ ही सभी प्रमुख भाषाओं में उपलब्ध रहेंगे। सम्मेलन के बाद यह प्रदर्शनी आम लोगों के लिए खुली रहेगी।
प्रवासी भारतीय सम्मेलन के दौरान बड़ा लालपुर स्थित स्टेडियम में देश की पुरातन संस्कृति, कला, धर्म और साहित्य की विधिवत जानकारी ली जा सके, इसके लिए नई दिल्ली स्थित नेशनल म्यूजियम, बीएचयू के केंद्रीय ग्रंथालय सहित अन्य प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों और संग्रहालयों की मदद ली जा रही है।
व्यवस्था कुछ इस तरह से की जाएगी कि एक ही स्थान पर प्रवासी भारतीय सैकड़ों साल पुरानी विविधता में एकता के साथ धार्मिक पुस्तकें, ग्रंथों की जानकारी कर पाएंगे। प्रदर्शनी में ऑडियो सिस्टम के जरिये भी जानकारी दी जाएगी। मंडलायुक्त दीपक अग्रवाल ने बताया कि प्रदर्शनी की तैयारी पूरी कर ली गई है। इसमें सभी धर्मों के पुरातन ग्रंथों और पुस्तकों को एक जगह प्रदर्शित किया जाएगा।
21 से शुरू होकर 23 जनवरी तक चलने वाले प्रवासी भारतीय सम्मेलन की तैयारियों को पूरा करना चुनौती बना है। सात दिनों में 30 फीसदी काम पूरा करने की चुनौती है। उधर, काम को गति देने के लिए 27 कर्मचारियों के साथ विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष राजेश कुमार ने कैंप शुरू कर दिया है। टेंट सिटी में 50 डीलक्स विला बनाये जाएंगे, जिसमें 100 प्रवासी ठहरेंगे।
इसके लिए 10 हजार रुपया रोजाना चार्ज होगा। डीलक्स रॉयल कॉटेज प्रीमियर विला 450 बनेंगे। वहींमिनी बेड रूम 120 तैयार किए जाएंगे। वीडीए वीसी राजेश कुमार बताते हैं कि पूरा काम 17 जनवरी तक पूरा कर लिया जाएगा।
पूरे टेंट सिटी व विला के अलावा ऐढे में 40 पानी की टंकियां लगाई जाएंगी ताकि सभी को पानी पहुंचाई जा सके। आठ पानी टंकियों के लगाने का काम पूरा कर लिया गया है। वहीं बाकी के लिए गड्ढे आदि खोदकर उसका स्ट्रक्चर खड़ा हो रहा है। उधर, भूमिगत पाइप लाईन पर भी काम चल रहा है। ग्रीन एग्रो नेट पूरे परिसर में बिछाया जाएगा ताकि धूल का उड़ना पूरी तरह से बंद हो जाए।