ब्राह्मी लिपि के बारे में सीखेंगे युवा।
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डॉ. इंदु जैन राष्ट्र गौरव ने बताया कि नई पीढ़ी को सभी लिपियों की जननी और विश्व की सबसे प्राचीन ब्राह्मी लिपि को सिखाने के उद्देश्य से इस कार्यशाला की शुरुआत की गई है। जैनधर्म के प्रथम तीर्थंकर आदिनाथ ने राजा ऋषभदेव के रूप में सर्वोत्तम राज्य किया था।
राजा ऋषभदेव ने सर्वप्रथम बालिका शिक्षा का उद्घोष करते हुए अपनी पुत्री ब्राह्मी को लिपि विद्या एवं पुत्री सुंदरी को अंक (गणित) विद्या सिखाई थी। अंक विद्या का विकास आज गणित के रूप में है और ब्राह्मी लिपि के नाम से प्रसिद्ध हुई और इसी लिपि से सभी लिपियों का जन्म और विकास हुआ है। बताया कि भारत का नाम भी राजा ऋषभदेव के ज्येष्ठ पुत्र चक्रवर्ती सम्राट भरत के नाम पर पड़ा।