बीएचयू के वैदिक विज्ञान केंद्र में पांच दिवसीय इनोवेशन, डिजाइन एंड एंटरप्रेन्योरशिप(आईडीई) बूटकैंप 2026 का सोमवार को आगाज हुआ। इस दौरान डिजाइन, स्टार्टअप पर मंथन के साथ ही विभिन्न समस्याओं के समाधान के हल पर भी विद्यार्थी काम करेंगे। पहले दिन विशेषज्ञों ने नवाचार और उद्यमिता से जुड़ी बारीकियां बताईं।
आईडीई बूटकैंप तीसरे एडिशन का शुभारंभ सोमवार को हुआ। बतौर मुख्य अतिथि प्रो. एस श्रीकृष्णा ने कहा कि नवाचार (इनोवेशन) को वर्तमान समय की जरूरत है। उन्होंने कहा कि यह समाज और राष्ट्र निर्माण की आधारशिला है। विशिष्ट अतिथि प्रो. राकेश सिंह ने कृषि क्षेत्र में नवाचार की भूमिका को अहम बताते हुए कहा कि आधुनिक तकनीकों और रचनात्मक सोच के बारे में किसानों को जागरूक करना होगा। एआईसीटीई इनोवेशन सेल के मदन मोहन ने बूटकैंप को युवाओं के लिए बहुत उपयोगी बताया।
वाधवानी फाउंडेशन की वाणी गंधा ने प्रतिभागियों को समस्याओं के समाधान के लिए मैटेरियल बेस्ड थिंकिंग और व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाने के लिए प्रेरित किया। कहा कि किसी भी सफल नवाचार की शुरुआत समस्या की गहरी समझ से होती है। पहले दिन काल्पनिक परिस्थितियों के माध्यम से प्रतिभागियों को निर्णय लेने और जिम्मेदारी समझने के लिए प्रेरित किया गया। स्वागत करते हुए बीएचयू व्यावहारिक कला विभाग के प्रो. मनीष अरोरा ने बूटकैम्प के उद्देश्यों, संरचना और इसकी उपयोगिता पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि बूटकैंप में डिजाइन थिंकिंग, स्टार्टअप विकास और वास्तविक समस्याओं के समाधान पर केंद्रित गहन प्रशिक्षण मिलेगा।