अक्षर-अक्षर दीप जले, फैले शिक्षा का उजियारा..., पढ़ी लिखी लड़की, रोशनी है घर की...। सर्व शिक्षा अभियान के तहत रैली निकाल कर शिक्षा की अलख जगाने वाला शिक्षा विभाग बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ कर रहा है। नि:शुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा के तहत आठवीं तक के बच्चों को मुफ्त में दी जाने वाली किताबें तब मिलीं, जब उनकी अर्द्धवार्षिक परीक्षाएं शुरू हो गईं। गुरुवार को काशी विद्यापीठ ब्लॉक के ककरहिया संकुल में परीक्षा के दिन बच्चों को किताबें दी गई, जिसे वे सिर पर रखकर प्राइमरी स्कूल बखरिया ले जा रहे थे। दूसरी ओर बीएसए जयकरन यादव का दावा है कि प्राइमरी और मिडिल स्कूलों में मुफ्त में दी जाने वाली किताबें शत-प्रतिशत वितरित कर दी गई हैं। नियमानुसार बच्चों को पढ़ने केलिए जो किताबें जुलाई में मिल जानी चाहिए वह आधा सत्र बीत जाने के बाद भी नहीं मिल सकी हैं। वहीं, शिक्षा विभाग का दावा है कि बच्चों को शत-प्रतिशत किताबें बांट दी गई है। सरकार की ओर से इन बच्चों को मुफ्त में यूनिफार्म, किताबें और शिक्षा दी जाती है।
जिले के परिषदीय विद्यालयों में एक से आठ तक के शतप्रतिशत बच्चों को किताबें नहीं मिल पाई हैं, ऐसे में बच्चों को पढ़ाई करने में असुविधा हो रही है। इन सबके बीच अर्द्धवार्षिक परीक्षाएं गुरुवार से शुरू हो गईं। पहले जहां कापी, पेपर नहीं मिलता था, वहीं अबकी बार परीक्षा में प्रश्नपत्र और उत्तरपुस्तिका दोनों मिलने से बच्चे उत्साहित दिखे। जिले में 1373 परिषदीय विद्यालय हैं, जिसमें 1013 प्राथमिक, 354 पूर्व माध्यमिक, छह कस्तूरबा विद्यालय हैं। 25 अक्तूबर तक चलने वाली परीक्षा में इस बार 1.67 लाख बच्चे शामिल होंगे। पहली बार परीक्षा को देखकर ऐसे लग रहा था जैसे कि बोर्ड परीक्षा चल रही हो। छात्रों के रोल नंबर के हिसाब से सीटिंग प्लान भी लगा था। नकल न हो इसके लिए नियुक्त उड़ाका दल की टीम निगरानी करती रही।