घाटों पर मौजूद सुरक्षा इंतजामों का जायजा लेते हुए उन्होंने चेतावनी संकेतकों, बैरिकेडिंग और वाटर सेफ्टी नेट की मजबूती को परखा। अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि श्रद्धालुओं को केवल सुरक्षित स्थानों पर ही स्नान करने के लिए जागरूक किया जाए और गहरे पानी में जाने से रोका जाए, ताकि किसी भी प्रकार की दुर्घटना से बचा जा सके।
उन्होंने घाटों पर लगातार पुलिस की मौजूदगी सुनिश्चित करने, संदिग्ध गतिविधियों पर सतर्क निगरानी रखने और किसी भी आपात स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया प्रणाली को सक्रिय रखने के निर्देश दिए। भीड़भाड़ वाले इलाकों में ड्रोन और सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से निगरानी बढ़ाने पर भी जोर दिया गया। इसके अलावा स्वच्छता, पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था और आपातकालीन सुविधाओं को सुदृढ़ करने के निर्देश संबंधित विभागों को दिए गए।
निरीक्षण के बाद पुलिस आयुक्त मंडुवाडीह थाने पहुंचे, जहां उन्होंने नवागंतुक आरक्षियों से संवाद कर उनकी समस्याएं और मूलभूत सुविधाओं की जानकारी ली। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि आरक्षियों को आधुनिक तकनीकी प्रशिक्षण देकर उन्हें दक्ष, अनुशासित और सक्षम पुलिसकर्मी के रूप में विकसित किया जाए। इस दौरान डीसीपी काशी जोन गौरव बंसवाल और एडीसीपी काशी वैभव बांगर सहित अन्य पुलिस अधिकारी भी मौजूद रहे।