पिछली सरकारों की तरह मोदी सरकार रोना नहीं रोती है। यहां से 100 रूपये दिया जाता है तो 15 पैसा ही गरीबों को मिलता है। सरकार ने पारदर्शिता कायम करते हुए डीबीटी के माध्यम से धनराशि भेजने की व्यवस्था बनाई है। 1944 में बनी छात्रवृत्ति नीति के तहत 2013- 14 में दसवीं की पढ़ाई करने वाले मात्र 17 प्रतिशत थे। जो 2014 के बाद 23 प्रतिशत हो गए थे। आगामी 2025 तक इसे 27 प्रतिशत तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।