चर्चा है कि बलिया से भरत सिंह, जौनपुर से केपी सिंह, भदोही से वीरेंद्र सिंह मस्त, घोसी से हरिनारायण राजभर और राबर्ट्सगंज से छोटेलाल खरवार को दोबारा टिकट नहीं मिल रहा है। बलिया से केतकी सिंह, भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष दयाशंकर सिंह भी दावेदार हैं। सपा से नीरज शेखर को प्रत्याशी बनाए जाने पर जातीय समीकरणों को दुरुस्त करने के लिए भरत सिंह की टिकट काटी जा सकती है।
जौनपुर में भी पार्टी नया प्रयोग करना चाहती है। भाजपा प्रवक्ता प्रेम शुक्ला जौनपुर के हैं और इन दिनों उनकी सक्रियता उनको टिकट दिए जाने का संकेत दे रही है। सीट से भोजपुरी फिल्मों के अभिनेता रवि किशन की भी चर्चा है। बसपा की ओर से रंगनाथ मिश्र की उम्मीदवारी के बाद मस्त के लिए भदोही संसदीय क्षेत्र का जातीय गणित उपयुक्त नहीं माना जा रहा है।
बसपा से रंगनाथ मिश्र की उम्मीदवारी उनकी राह मुश्किल कर रही है। भाजपा खेमें में चर्चा है कि यहां से पिछड़ा कार्ड चलकर बसपा से निष्कासित रमेश चंद्र बिंद को लड़ाया जा सकता है। संभावना यह भी है कि मस्त को बलिया से चुनाव लड़ाया जाए।
राबर्ट्सगंज सांसद खरवार और घोसी सांसद राजभर प्रदेश सरकार की कार्यशैली पर जब-तब सवाल उठाते रहे हैं। दोनों की भाजपा कार्यकर्ताओं से अनबन भी कई बार जाहिर हो चुकी है। हरिनारायण की जगह भाजपा प्रदेश के वन मंत्री दारा सिंह को उम्मीदवार बना सकती है।
पिछली बार बसपा के टिकट पर दूसरे स्थान पर रहना दारा सिंह के पक्ष को मजबूत करता है। खरवार की उम्मीदवारी इसलिए भी खतरे में है, क्योंकि अद (एस) मिर्जापुर सीट पर लाभ के लिए यहां से पकौड़ी लाल कोल के लिए टिकट मांग रहा है।
नितिन गडकरी के साथ रामचरित्र निषाद (फाइल फोटो)
दूसरी ओर मछलीशहर से भाजपा के प्रदेश महामंत्री और विधान परिषद सदस्य विद्यासागर सोनकर के अलावा केराकत विधायक दिनेश चौधरी को प्रत्याशी बनाए जाने और मौजूदा सांसद रामचरित्र निषाद को दिल्ली से किसी क्षेत्र से उम्मीदवार बनाए जाने की चर्चा थी।
अब कहा जा रहा है कि गडकरी की ‘कृपा’ से मौजूदा सांसद राम चरित्र निषाद की टिकट बच जाएगी। बताया जा रहा है कि गोरखपुर उपचुनाव में पराजय के बाद भाजपा निषाद समुदाय को नाराज नहीं करना चाहती है।