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बनारस के मुस्लिम बहुल इलाकों में भाजपा की जीत ने बदला सियासत का रुख

Tue, 14 Mar 2017 04:14 PM IST
तबस्सुम, अमर उजाला, वाराणसी
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muslim women in varanasi - फोटो : अमर उजाला
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वाराणसी में शहर की तीन विधानसभा सीटों के नतीजे बेहद चौंकाने वाले रहे। मुस्लिम बाहुल्य इलाकों वाले विधानसभा क्षेत्र शहर उत्तरी, दक्षिणी और कैंट में हार जीत का अंतर राजनीतिक विश्लेषकों के लिए कई सवाल पैदा कर रहा है।
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जिस तरह इन तीन विधानसभा में भाजपा को वोट मिले हैं, उससे यह साफ है कि यहां सपा-कांग्रेस गठबंधन और बसपा मुस्लिम मतों का ध्रुवीकरण करने में नाकाम रही। अब तक भाजपा से परहेज करने वाले मुस्लिमों ने कुछ हद तक उसके पक्ष में वोट किया है।

खासकर ‘तीन तलाक’ के मुद्दे पर तमाम मुस्लिम महिलाओं ने भाजपा के पक्ष में वोटिंग की। हालांकि इस बात से मुस्लिम तबके के नुमाइंदे साफ इंकार कर रहे हैं।

वजह कुछ भी हो लेकिन जानकारों का दावा है कि सपा-कांग्रेस गठबंधन और बसपा के बीच मुस्लिम वोटों का बंटवारा होने से उसका सीधा फायदा तो भाजपा को हुआ ही, कुछ मुस्लिम वोट भी उसके हिस्से आए। इससे उसकी बढ़त और मजबूत हुई। 
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शहर दक्षिणी में बीजेपी के नीलकंठ तिवारी को 92560 वोट मिले हैं जबकि दूसरे नंबर पर सपा-कांग्रेस गठबंधन से डॉ. राजेश मिश्र को 75334 वोट मिले। बसपा छह हजार के अंदर सिमट गई।

 
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मुस्लिम वोटों के ध्रुवीकरण में नाकाम रहा सपा-कांग्रेस गठबंधन 

muslim women in varanasi - फोटो : अमर उजाला
​इस विधानसभा में जिले में सर्वाधिक करीब एक लाख से अधिक मुस्लिम मतदाता हैं। ऐसे में भाजपा की जीत को राजनीतिक विश्लेषक उसकी ओर मुस्लिम मतों के झुकाव से जोड़कर भी देख रहे हैं। 


वहीं शहर उत्तरी में अब तक के सबसे रिकार्ड वोटों से भाजपा के सिटिंग विधायक रवींद्र जायसवाल चुनाव जीते। प्रतिद्वंद्वी सपा-कांग्रेस गठबंधन के हाजी अब्दुल समद को उन्होंने 45502 वोटों से हराया। यह विधानसभा भी मुस्लिमों का गढ़ मानी जाती है, 80 हजार से अधिक मुस्लिम मतदाता हैं।

यही हाल कैंट विधानसभा का है। यहां पहली बार बीजेपी से चुनाव मैदान में उतरे सौरभ श्रीवास्तव को मोदी लहर में करीब सवा लाख वोट मिले। वह 51190 वोटों से चुनाव जीत गए।

मदनपुरा, रेवड़ीतालाब, बजरडीहा, शिवाला, गौरीगंज जैसे मुस्लिम इलाके इसी विधानसभा में आते हैं और यहां सबसे ज्यादा वोट भाजपा को हासिल हुए हैं।

सपा-कांग्रेस गठबंधन से अनिल श्रीवास्तव को 71168 वोट मिले, जबकि बसपा से मुस्लिम प्रत्याशी रिजवान अहमद महज 14070 वोटों पर सिमट गए। इससे साफ है कि मुस्लिम मत न सिर्फ सपा-कांग्रेस गठबंधन और बसपा के बीच बंटे बल्कि उसका एक  हिस्सा भाजपा के पक्ष में भी गया। 
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