विधानसभा चुनाव में इस बार भाजपा एक नया प्रयोग करने पर विचार कर रही है। गठबंधन के तहत चुनिंदा सीटों पर प्रत्याशी भले ही अपना दल (अनुप्रिया गुट) के होंगे लेकिन चुनाव निशान भाजपा का होगा। अपने बेस वोटरों की पसंद को देखते हुए भाजपा ऐसा चाहती है।
पार्टी के रणनीतिकारों का मानना है कि जो परंपरागत वोटर हैं, वो ‘कमल के फूल’ के अलावा दूसरे किसी सिंबल पर वोट देने से हिचकते हैं। दो साल पहले हुए रोहनिया विधानसभा क्षेत्र के उपचुनाव में यह स्पष्ट देखने को मिला था।
उपचुनाव में भाजपा-अपना दल गठबंधन के प्रत्याशी की हार की बड़ी वजह यही थी कि भाजपा के परंपरागत मतदाताओं ने कमल निशान न होने के चलते वोट नहीं किया था।
उपचुनाव में हार के कारणों की समीक्षा और पड़ताल में सामने आए इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए पार्टी के रणनीतिकार मौजूदा विधानसभा चुनाव में ऐसा नहीं होने देना चाहते।
पार्टी के उच्चपदस्थ सूत्रों की मानें तो मौजूदा विधानसभा चुनाव में परंपरागत मतदाताओं के सामने ऐसी कोई दुविधा की स्थिति न बनने पाए, इस पर विचार किया जा रहा है। प्रयास किया जा रहा है कि प्रत्याशी भले गठबंधन का हो लेकिन सिंबल कमल का फूल ही रखा जाए।
गौरतलब है कि अपना दल (अनुप्रिया गुट) रोहनिया के अलावा पिंडरा और सेवापुरी सीट से अपना प्रत्याशी उतारने की दावेदारी भाजपा राष्ट्रीय कार्यकारिणी से कर चुका है।
लेकिन, अंदरखाने चर्चा है कि पीएम के संसदीय क्षेत्र की पांच विधानसभा सीटों में एक ही सीट अपना दल के लिए छोड़ी जाएगी। सिंबल पर सहमति के लिए दोनों पार्टी के आला नेताओं की बैठकें चल रही हैं। सहमति के आधार पर जल्द निर्णय लिया जाएगा।