बनारस के चोलापुर में रविवार शाम गंगा-गोमती संगम किनारे मंच पर भोजपुरी और कथक का मिलन हुआ। यमराज के पराजित होने वाले स्थान संगम घाट कैथी पर एक ओर कथक की शानदार प्रस्तुति हुई तो दूसरी ओर भोजपुरी गीतों पर युवा झूमते रहे। साथ ही देवी गीतों पर भक्ति की रसधार भी बही। मौका था दो दिवसीय ‘श्री मार्कण्डेय महोसव’ का। कार्यक्रम की शुरुआत शिव वंदना से हुई।
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बनारस घराने के माता प्रसाद मिश्र ने कथक की शानदार प्रस्तुति कर दर्शकों को थिरकने पर मजबूर कर दिया। उन्होंने कथक की विभिन्न कलाओं के साथ क्रिकेट खेल के विभिन्न खिलाड़ियों जैसे हरभजन सिंह, युवराज सिंह आदि के खेलने के अंदाज के साथ ही चौकों, छक्कों, एलबीडब्ल्यू, आउट होने के अंदाज को कथक के माध्यम से प्रस्तुत कर आश्चर्यचकित कर दिया।
तबले पर उदय शंकर मिश्रा, गायन में संतोष मिश्र, सितार पर ध्रुव कुमार ने संगत की। संतोष मिश्र ने प्रेम भजन ना... का गायन कर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। कथक में माता प्रसाद मिश्रा व उनके सुपुत्र रुद्र शंकर की प्रस्तुति शानदार रही।
अंतिम निशा में भोजपुरी के प्रसिद्ध लोकगीत गायक मोहन राठौर ने भोजपुरी भजनों व लोकगीतों से लोगों को झूमाने पर मजबूर कर दिया। इसके बाद जईसन सोंचले रहली..., सांवर न गोर बाड़ी हो... प्रस्तुत किया तो युवा थिरकने से खुद को नहीं रोक सके। वहीं, लोकगीत गायक सांस्कृतिक विभाग के दीपक सिंह के बम-बम बोल रहा है काशी... पर वातावरण शिवमय बना गया।